Oil, Gas and Now Internet: Growing Threats on the Hormuz Route Raise Concerns the World
Iran War Updates: मध्य पूर्व में जारी तनाव ने अब सिर्फ oil supply और gas supply ही नहीं, बल्कि global internet connectivity को लेकर भी बड़ी चिंता पैदा कर दी है। हॉर्मुज और लाल सागर जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे के बीच अब उन submarine cables पर भी नजरें टिक गई हैं, जिनके सहारे दुनिया का बड़ा हिस्सा डिजिटल रूप से जुड़ा हुआ है। अगर इन अंडरसी केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो भारत समेत कई देशों में internet services, banking network, digital payments, cloud services और AI platforms पर असर पड़ सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समय दो समुद्री क्षेत्र सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जा रहे हैं—Strait of Hormuz और Bab-el-Mandeb route। इन दोनों इलाकों के नीचे fiber optic cable network का बड़ा जाल बिछा है, जो एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच data traffic को संभालता है। हॉर्मुज को लेकर पहले ही shipping और insurance sectors में चिंता बढ़ी हुई है, जबकि लाल सागर क्षेत्र में लगातार हमलों की वजह से maritime security पर दबाव बना हुआ है।
समुद्र के नीचे बिछी ये internet cables दिखने में भले पतली हों, लेकिन आधुनिक दुनिया की डिजिटल लाइफलाइन इन्हीं पर टिकी है। Video calls, emails, bank transactions, stock market data, cloud computing, AI services और international business communication का बड़ा हिस्सा इन्हीं के जरिए चलता है। ऐसे में अगर किसी वजह से ये केबल्स क्षतिग्रस्त होती हैं, तो उसका असर केवल internet speed तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई देशों की digital economy भी प्रभावित हो सकती है।
हॉर्मुज के सबसे संकरे हिस्से में समुद्र की गहराई अपेक्षाकृत कम बताई जाती है, जिससे वहां मौजूद undersea infrastructure अधिक संवेदनशील हो जाता है। इसी वजह से सुरक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि इस तरह के choke points केवल energy trade ही नहीं, बल्कि global data routes के लिए भी बेहद अहम हैं।
जानकारी के अनुसार, Red Sea और Hormuz corridor से कई महत्वपूर्ण केबल गुजरती हैं। लाल सागर से गुजरने वाली केबल्स यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच data exchange की रीढ़ मानी जाती हैं, जबकि हॉर्मुज क्षेत्र में मौजूद कुछ active cable systems भारत और खाड़ी देशों के बीच connectivity को सपोर्ट करते हैं। इनमें AAE-1, Falcon, Gulf Bridge International और Tata TGN Gulf जैसी systems का जिक्र किया जाता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह का disruption भारत के international data links पर भी असर डाल सकता है।
भारत के लिए यह खतरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की banking services, UPI ecosystem, international transactions, IT services, outsourcing industry और global cloud-based operations बड़े पैमाने पर stable international connectivity पर निर्भर हैं। अगर Middle East के इन routes में लंबे समय तक रुकावट आती है, तो भारत में internet पूरी तरह बंद होना जरूरी नहीं, लेकिन latency, service slowdown, international access issues और financial systems पर दबाव जैसे असर दिखाई दे सकते हैं।
इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र में Amazon, Microsoft और Google जैसी बड़ी tech companies ने अपने data centers और cloud infrastructure स्थापित कर रखे हैं। ये सभी systems undersea cable network से जुड़े हैं। ऐसे में यदि इस समुद्री digital backbone पर दबाव बढ़ता है, तो असर regional नहीं बल्कि global level पर महसूस किया जा सकता है।
कुल मिलाकर, Middle East conflict अब केवल युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। इसका असर energy market, shipping routes, digital infrastructure और global communication network तक फैलता दिख रहा है। आने वाले दिनों में अगर हालात नहीं सुधरे, तो दुनिया को तेल-गैस के साथ-साथ internet disruption risk का भी सामना करना पड़ सकता है, और भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा।