US-Iran Conflict: Attacks continue for 13 days; growing concern for US citizens stranded in the Middle East.
Middle East Crisis लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी सेना ने लगातार 13वीं रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिए हैं कि वह ईरान के खिलाफ और बड़े सैन्य कदम पर विचार कर रहे हैं, हालांकि अंतिम फैसला अभी नहीं लिया गया है।
13वीं रात भी जारी रहे US Airstrikes
अमेरिकी Central Command (CENTCOM) के अनुसार, 13वीं रात तक चले अभियान में ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटी, कम्युनिकेशन नेटवर्क, तटीय निगरानी केंद्र और समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य Strait of Hormuz से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों और नागरिक समुद्री गतिविधियों के लिए पैदा होने वाले खतरे को कम करना है।
Middle East में फंसे अमेरिकी नागरिकों के लिए नई तैयारी
क्षेत्र में तेजी से बिगड़ते हालात को देखते हुए अमेरिकी विदेश विभाग एक बार फिर 24×7 Middle East Task Force शुरू करने पर विचार कर रहा है। इस टास्क फोर्स का उद्देश्य उन अमेरिकी नागरिकों की सहायता करना होगा जो संघर्ष और उड़ानों के रद्द होने के कारण मध्य पूर्व के विभिन्न देशों में फंस गए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें रद्द या निलंबित कर दी हैं और आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ सकती है। इसी वजह से अमेरिकी प्रशासन संभावित आपात स्थिति से निपटने की तैयारी कर रहा है।
युद्धविराम की कोशिशों के बावजूद जारी है संघर्ष
हालांकि जून में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से वार्ता शुरू हुई थी और दोनों पक्षों ने एक Memorandum of Understanding (MoU) पर भी सहमति जताई थी, लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई जारी है।
इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील केंद्र Strait of Hormuz बना हुआ है, जहां समुद्री सुरक्षा और तेल आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंता लगातार बढ़ रही है।
बढ़ती चिंताओं पर दुनिया की नजर
संयुक्त राष्ट्र महासचिव पहले ही मध्य पूर्व के हालात को नियंत्रण से बाहर होने की चेतावनी दे चुके हैं। वहीं क्षेत्रीय तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और एयर ट्रैफिक पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सैन्य टकराव और बढ़ता है तो इसका प्रभाव केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।