Concerns rise in Dehradun following the Delhi incident; 21 dilapidated buildings identified—7 are vacant, while 8 are still occupied.
नई दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत ढहने की घटना के बाद देहरादून में भी जर्जर और Dilapidated Buildings को लेकर चिंता बढ़ गई है। दिल्ली हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। इस घटना के बाद देहरादून नगर निगम और जिला प्रशासन की ओर से शहर में पहले से चिन्हित गिरासू भवनों को लेकर एक बार फिर लोगों को सतर्क किया जा रहा है। नगर निगम ने शहर में कुल 21 ऐसे भवन चिह्नित किए हैं, जिनकी स्थिति को जोखिम वाला माना गया है।
देहरादून में 21 गिरासू भवन चिन्हित
देहरादून में बरसात के दौरान लगातार बारिश के बीच पुराने और कमजोर भवनों को लेकर खतरा बढ़ जाता है। नगर निगम की ओर से चिह्नित 21 Unsafe Buildings के मालिकों और वहां रहने वाले लोगों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। प्रशासन की ओर से भवन खाली करने और सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
हालांकि, नोटिस जारी होने के बावजूद कुछ जर्जर भवनों में अभी भी लोग रह रहे हैं। ऐसे में बारिश के दौरान इन इमारतों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
7 भवन पूरी तरह खाली, 8 में रह रहे लोग
नगर निगम के अनुसार, चिह्नित 21 गिरासू भवनों में से 7 भवनों को पूरी तरह खाली कराया जा चुका है। वहीं, 8 भवनों में अभी भी मकान मालिक या किरायेदार रह रहे हैं। इसके अलावा 6 भवनों से संबंधित मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि सभी चिन्हित भवनों के मालिकों और किरायेदारों को आवश्यक नोटिस दिए जा चुके हैं। लोगों को संभावित खतरे को देखते हुए सावधानी बरतने के लिए कहा गया है।
इन इलाकों में मौजूद हैं जर्जर भवन
देहरादून के अलग-अलग क्षेत्रों में गिरासू भवन चिह्नित किए गए हैं। इनमें आढ़त बाजार, खदरी मोहल्ला, तिलक रोड, कैनाल रोड, मोती बाजार, गांधी रोड, खुड़बुड़ा, इंद्रेशनगर, कांवली रोड, पार्क रोड और कौलागढ़ रोड जैसे इलाके शामिल हैं।
इसके अलावा बल्लीवाला चौक, एलआईसी बिल्डिंग चकराता रोड, मोहब्बेवाला इंडस्ट्रियल एरिया और सैय्यद मोहल्ला सहित शहर के अन्य हिस्सों में भी जोखिम वाले भवनों की पहचान की गई है।
नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों पर भी खतरा
देहरादून में Monsoon Risk केवल जर्जर इमारतों तक सीमित नहीं है। शहर के कई इलाकों में नदी और नालों के किनारे भी लोग कच्चे-पक्के मकानों में रह रहे हैं। काठबंगला बस्ती, सपेरा बस्ती, चूना भट्ठा के आसपास और दून विहार जैसे क्षेत्रों में नदी-नालों के किनारे बसे घरों को लेकर भी प्रशासन सतर्क है।
बारिश के दौरान नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने, जलभराव और तेज बहाव की स्थिति में इन इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। जिला प्रशासन और नगर निगम की ओर से लोगों को मौसम को देखते हुए सतर्क रहने और किसी भी खतरे की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी जा रही है।
बारिश में बढ़ जाता है जर्जर भवनों का खतरा
लगातार बारिश से पुराने भवनों की दीवारों और संरचना पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में पहले से कमजोर इमारतों में रहने वाले लोगों के लिए अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। प्रशासन की ओर से चिह्नित Dangerous Buildings को खाली कराने की कार्रवाई के साथ लोगों को संभावित जोखिम के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
दिल्ली की इमारत गिरने की घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि शहरों में जर्जर और जोखिम वाले भवनों की समय पर पहचान और उन्हें खाली कराने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। देहरादून में भी अब इन भवनों और नदी-नालों के किनारे बसे इलाकों पर प्रशासन की निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।