लोक अदालत में 5 हजार से ज्यादा मामलों का निपटारा, जानें RCCMS Portal का पूरा प्रोसेस

Uttarakhand Lok Adalat और Online Revenue Case Filing को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश में आम लोगों को जमीन, नामांतरण, विरासत और राजस्व विवादों के मामलों में राहत देने के लिए 210 स्थानों पर एक साथ राजस्व लोक अदालतों का आयोजन किया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि लोगों को court rounds, लंबी प्रक्रिया और देरी से छुटकारा मिले।

13 जिलों में एक साथ लगी Revenue Lok Adalat

राज्य के सभी 13 जिलों में एक साथ 210 venues पर राजस्व लोक अदालत (Revenue Lok Adalat) आयोजित की गई। पहले ही दिन इस अभियान को बड़ा रिस्पॉन्स मिला।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक:

कुल सुनवाई वाले मामले: 6,933
निपटाए गए मामले: 5,322

यह आंकड़ा दिखाता है कि fast-track justice और accessible governance की दिशा में यह पहल असर दिखाने लगी है।

किन मामलों की हो रही सुनवाई?

इन लोक अदालतों में आम जनता से जुड़े कई जरूरी और संवेदनशील मामलों को priority basis पर लिया जा रहा है। इनमें शामिल हैं:

Land Dispute / भूमि विवाद
Mutation / नामांतरण
Inheritance / विरासत विवाद
Stamp Act Cases
Excise Cases / आबकारी मामले
Food Department Cases
SARFAESI Act से जुड़े मामले
Goonda Act
CRPC से जुड़े राजस्व मामले
Electricity Act
Senior Citizen Act
Rent Control Act

सरकार का मानना है कि इससे pending cases का बोझ कम होगा और लोगों को quick disposal का लाभ मिलेगा।

Online Case Filing: अब घर बैठे दर्ज होगा जमीन का केस

उत्तराखंड सरकार अब Digital Land Justice System को और मजबूत करने जा रही है। जल्द ही लोग RCCMS Portal के जरिए घर बैठे online case register कर सकेंगे।

यह सुविधा खास तौर पर उन लोगों के लिए राहत होगी, जो land records, mutation issues, boundary disputes या inheritance cases को लेकर दफ्तरों और अदालतों के चक्कर काटते हैं।

RCCMS Portal क्या है?

RCCMS (Revenue Court Computerized Management System) उत्तराखंड राजस्व विभाग का एक digital case management platform है, जिसे अब आम जनता के लिए और आसान बनाने की तैयारी की जा रही है।

सरकार का लक्ष्य है कि अगले एक महीने के भीतर इस पर online case filing window शुरू कर दी जाए।

Online Case कैसे दर्ज होगा? Step-by-Step Process

अगर यह सुविधा शुरू होती है, तो आम नागरिक इस तरह से online revenue case file कर सकेंगे:

1) RCCMS Portal पर जाएं

सबसे पहले आवेदक को राजस्व विभाग के RCCMS Portal पर लॉगिन करना होगा।

2) अलग Window में आवेदन भरें

पोर्टल पर Online Case Filing के लिए अलग से एक dedicated window उपलब्ध होगी।

3) ज़रूरी दस्तावेज़ अपलोड करें

आवेदन के साथ आपको ये डिटेल्स और दस्तावेज़ अपलोड करने होंगे:

खसरा नंबर
खतौनी विवरण
भूमि से जुड़े अन्य रिकॉर्ड
पहचान और सहायक दस्तावेज़
4) संबंधित Court चुनें

आवेदक को अपने मामले के अनुसार संबंधित राजस्व न्यायालय (Revenue Court) का चयन करना होगा।

5) पेशकार करेगा Verification

कोर्ट का पेशकार / dealing official दस्तावेज़ों की जांच करेगा।

6) फीस Payment Link मिलेगा

अगर सभी दस्तावेज़ सही पाए गए, तो आवेदक को:

Case Acceptance Information
वाद शुल्क (Case Fee) Payment Link

भेजा जाएगा।

7) Documents अधूरे होने पर Update का मौका

अगर आवेदन में कोई कमी होगी, तो उसे reject नहीं किया जाएगा, बल्कि आवेदक को document update / correction के लिए सूचना दी जाएगी।

जमीन की लड़ाई अब घर बैठे

राज्य सरकार की यह पहल खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद होगी, जो:

गांव या दूरदराज क्षेत्र में रहते हैं
बार-बार तहसील या कोर्ट नहीं जा सकते
land mutation, inheritance transfer, measurement dispute, illegal possession जैसे मामलों से जूझ रहे हैं

इससे citizen convenience, e-governance और paperless legal access को बढ़ावा मिलेगा।

विरासत के मामलों में बड़ी राहत: तेरहवीं तक नई खतौनी

सरकार ने uncontested inheritance cases यानी अविवादित विरासत के मामलों में भी बड़ा फैसला लिया है।

अब कोशिश यह है कि भू-स्वामी की मृत्यु के बाद परिवार को तेरहवीं / पीपलपानी तक ही नई खतौनी (updated land record) उपलब्ध करा दी जाए।

इसका मतलब क्या है?

अगर किसी जमीन पर कोई विवाद नहीं है, तो परिवार को:

नामांतरण (Mutation)
वारिसाना हक (Inheritance Rights)
नई खतौनी

के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

यह कदम ग्रामीण परिवारों के लिए खास तौर पर बहुत राहत देने वाला हो सकता है।

एक महीने में निपटेंगे पैमाइश और कब्जे के मामले

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि:

विवादित भूमि की पैमाइश (land measurement disputes)
कब्जे से जुड़े मामले (encroachment / possession issues)

को एक महीने के भीतर निस्तारित करने की कोशिश की जाए।

अगर यह सिस्टम सही तरीके से लागू होता है, तो उत्तराखंड में land administration reforms को बड़ी रफ्तार मिल सकती है।

CM Dhami का फोकस: “न्याय आपके द्वार”

मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami की पहल “Nyay Aapke Dwar” अब सिर्फ घोषणा नहीं, बल्कि ground implementation की तरफ बढ़ती दिखाई दे रही है।

सरकार का दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य है:

आम लोगों को court burden से राहत
fast dispute resolution
transparent revenue administration
digital public service delivery

क्यों अहम है यह पहल?

उत्तराखंड जैसे राज्य में land-related disputes सबसे आम प्रशासनिक और पारिवारिक विवादों में गिने जाते हैं। ऐसे में:

Online Filing
Lok Adalat Disposal
Mutation Fast Track
Inheritance Simplification

जैसे कदम सीधे तौर पर जनता को राहत दे सकते हैं।

यह मॉडल अगर सफल रहा, तो आगे चलकर दूसरे राज्यों के लिए भी best practice in digital justice delivery बन सकता है।