Park Circus Violence के बाद एक्शन मोड में सरकार, CM Suvendu Adhikari ने कही बड़ी बात

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता एक बार फिर Political Tension और Law and Order को लेकर सुर्खियों में है। Park Circus इलाके में सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने पर लगी रोक और Anti-Encroachment Drive के विरोध में हुए प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों पर पथराव किया गया, जिसके बाद इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं।

घटना के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा कि धार्मिक नारों की आड़ में हिंसा और Stone Pelting किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अब बंगाल में कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों पर कड़ा ऐक्शन होगा।

रविवार को Park Circus Seven Point Crossing पर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए थे। प्रदर्शनकारी राज्य सरकार के हालिया फैसलों का विरोध कर रहे थे। इनमें Public Namaz Restrictions, अजान और ईद पर नई Guidelines तथा Encroachment Removal Campaign शामिल हैं। देखते ही देखते प्रदर्शन उग्र हो गया और हालात बेकाबू हो गए।

पुलिस के मुताबिक भीड़ ने कई सरकारी वाहनों को निशाना बनाया। Central Armed Police Forces (CAPF) और पुलिस टीमों पर पत्थर फेंके गए, जिसमें कई जवान घायल हो गए। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग और लाठीचार्ज करना पड़ा।

हिंसा के बाद Kolkata Police ने बड़ा ऐक्शन लेते हुए करीब 40 लोगों को गिरफ्तार किया है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल, CRPF और Rapid Action Teams की तैनाती की गई है। सोमवार को भी इलाके में Flag March निकाला गया ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घायल सुरक्षाकर्मियों से मुलाकात की और कहा कि बंगाल में अब “Stone Pelting Culture” को खत्म किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस पर हमला किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

इस पूरे मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। बीजेपी नेताओं ने हिंसा के लिए विपक्ष और कथित तुष्टिकरण की राजनीति को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बंगाल में “Bulldozer Politics” की कोई जगह नहीं है।

राज्य सरकार और प्रशासन अब स्थिति को पूरी तरह सामान्य करने की कोशिश में जुटे हैं। हालांकि इस घटना के बाद Bengal Politics, Religious Freedom और Public Order को लेकर बहस और तेज हो गई है।