क्या Akshay Kumar की ‘Kesari 2’ वाकई इतिहास के करीब है या सिर्फ फिल्मी तड़का?

Kesari Chapter 2 एक courtroom drama है जो इतिहास की पृष्ठभूमि में बुनी गई एक semi-fictional legal thriller है। फिल्म जलियांवाला बाग नरसंहार (Jallianwala Bagh Massacre) जैसी दिल दहला देने वाली घटना को केंद्र में रखती है, लेकिन इतिहास के तथ्यों और सिनेमाई आज़ादी के बीच संतुलन साधने में कुछ जगह फिसल भी जाती है।

Real Facts Vs Film Fiction: कहां सच्चाई, कहां कल्पना?

फिल्म की कहानी आधारित है ‘The Case That Shook The Empire’ नाम की किताब पर, जिसे शंकरन नायर के पड़पोते रघु पलट और उनकी पत्नी पुष्पा पलट ने लिखा है। फिल्म का फोकस है कि कैसे Sir C. Sankaran Nair (Akshay Kumar) ने जलियांवाला बाग नरसंहार के दोषियों – General Dyer और Lt. Governor Michael O’Dwyer – को British Court में घसीटा।

लेकिन असलियत में, यह मामला एक defamation case था जिसे लंदन की King’s Bench Division (ब्रिटिश हाईकोर्ट) में लड़ा गया था – न कि भारतीय अदालत में, जैसा फिल्म में दिखाया गया है। और नायर साहब यह केस हार भी गए थे – एक ऐसा तथ्य जिसे फिल्म बड़े आराम से इग्नोर कर देती है।

Courtroom Drama या Emotional Spectacle?

Director Karan Singh Tyagi खुद एक वकील हैं, इसलिए courtroom की टेक्निकल बारीकियां कई सीन में उभर कर आती हैं। Akshay Kumar एक बहादुर लेकिन नाटकीय वकील के रोल में हैं, जो कई बार जासूस ज्यादा लगते हैं। R. Madhavan एक suave British barrister के रोल में अपनी छाप छोड़ते हैं। वहीं Ananya Panday को सिर्फ “किसी को तो रखना ही था” वाले अंदाज़ में कास्ट किया गया लगता है – उनका किरदार वकील कम, किसी detective assistant जैसा लगता है।

Screenplay और Dialogues: Strong लेकिन selective

फिल्म की screenplay engaging है और dialogues में उस समय की पीड़ा को पकड़ने की कोशिश की गई है। कई सीन genuinely प्रभावशाली हैं – खासकर courtroom confrontations और जलियांवाला बाग की विजुअल झलकियां।

What Works & What Doesn’t

क्या अच्छा है:

  • Powerful subject (Jallianwala Bagh Tragedy)

  • Dialogues में दम है

  • Madhavan vs Akshay के courtroom scenes

  • कुछ दिल को छू लेने वाले भावुक क्षण

 क्या खटकता है:

  • ऐतिहासिक तथ्यों से कई बार समझौता

  • अनन्या का irrelevant role

  • ज्यादा cinematic liberty, कम historical accuracy

  • British Court को Indian बना देना

Final Verdict:

Kesari Chapter 2 एक watchable film है जो इतिहास में रुचि रखने वालों को आकर्षित कर सकती है, लेकिन यह पूरी तरह से truth-based cinema नहीं है। इसे देखने के बाद अगर आप थोड़ा Google या ChatGPT करेंगे तो शायद सही और गलत में फर्क करना आसान होगा। फिल्म emotionally effective है, लेकिन historically inconsistent भी।

Rating: 3.5/5

साभार – प्रकाश हिन्दुस्तानी जी (की कलम से द्वारा फ़ेसबुक)