From the petition against Gyanesh Kumar to street protests—a major update on the SIR controversy.
Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर राजनीतिक और कानूनी सवालों का सिलसिला तेज हो गया है। शुक्रवार को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई। याचिका में SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामले की SIT Investigation कराने और संबंधित फैसलों की जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने CEC के खिलाफ कथित वैधानिक उल्लंघनों पर कार्रवाई की मांग भी की है।
13 करोड़ वोट हटने का दावा
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका और राजनीतिक संगठनों की ओर से मतदाता सूची को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। Cockroach Janta Party (CJP) ने दावा किया है कि SIR के दौरान 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 13 करोड़ से अधिक नाम बाहर हुए। संगठन ने इस प्रक्रिया पर स्वतंत्र जांच की मांग की है। हालांकि, इन आंकड़ों और प्रक्रिया की राजनीतिक व्याख्या को लेकर पक्षों के बीच मतभेद हैं।
याचिका में Form-6 से जुड़ी प्रक्रिया की समीक्षा और पहले की मतदाता सूची बहाल करने जैसी मांगों का भी उल्लेख किया गया है। Form-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नया नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने SIR से जुड़े Form-6 और Form-8 संबंधी आदेशों को तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी मिलने की बात कही है।
चुनाव आयुक्तों के बीच असहमति की रिपोर्ट के बाद विवाद तेज
SIR को लेकर विवाद उस रिपोर्ट के बाद और बढ़ा जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने, Form-6 में बदलाव और Electoral Roll Data के केंद्रीकरण जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया।
वहीं, चुनाव आयोग की ओर से इस तरह की व्याख्या पर आपत्ति जताई गई है। आयोग के अधिकारियों ने कहा है कि संबंधित आदेशों को तीनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी। इसलिए इस पूरे मामले में रिपोर्ट किए गए मतभेदों और आयोग के आधिकारिक रुख के बीच अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।
कांग्रेस का देशभर में प्रदर्शन
विवाद के बीच कांग्रेस ने 25 सितंबर को देशभर में चुनाव आयोग के कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था। पार्टी ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने और उनके कार्यकाल में हुए चुनावी फैसलों तथा Electoral Roll Changes की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है। दिल्ली समेत कई जगहों पर प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई।
कांग्रेस ने कहा है कि उसका विरोध SIR और मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर है। पार्टी के नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक विरोध का हिस्सा बताया गया है।
दिल्ली से लेकर लखनऊ और देहरादून तक प्रदर्शन
SIR विवाद को लेकर दिल्ली के अलावा लखनऊ और अन्य शहरों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन की खबरें सामने आई हैं। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भी कांग्रेस विधायकों ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की और पोस्टर दिखाए।
उत्तराखंड के देहरादून में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। वहीं दिल्ली में प्रदर्शन को देखते हुए ECI कार्यालय के बाहर पुलिस की तैनाती की गई।
CJP ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया
CJP के संयोजक अभिजीत दीपके ने CEC ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे के भीतर इस्तीफा देने की मांग की है। संगठन ने ऐसा नहीं होने पर 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की बात कही है। CJP ने SIR की स्वतंत्र जांच, पुरानी मतदाता सूची बहाल करने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त व चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव समेत कई मांगें रखी हैं।
चुनाव आयोग ने दी अलग तस्वीर
विवाद के बीच चुनाव आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े प्रमुख आदेशों पर CEC और दोनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी रही है। आयोग के अनुसार Form-6 और Form-8 से संबंधित SIR आदेशों में आवश्यक घोषणाओं का प्रावधान भी शामिल है। ऐसे में इस मुद्दे पर विपक्ष के आरोपों और चुनाव आयोग के आधिकारिक पक्ष के बीच स्पष्ट अंतर मौजूद है।
इस पूरे विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़े कुछ Youth Voter Awareness Programmes भी फिलहाल स्थगित किए जाने की जानकारी सामने आई है। चुनाव आयोग ने मेरठ और वाराणसी में प्रस्तावित कार्यक्रमों को अगली तारीख तक टाल दिया है।