Iran-UAE Tension के बीच भारत में होगी अहम BRICS बैठक, सबकी नजर दिल्ली पर

BRICS Foreign Ministers Meeting को लेकर भारत एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के केंद्र में आ गया है। 14 और 15 मई को नई दिल्ली में होने जा रही इस अहम बैठक में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देश एक ही टेबल पर नजर आएंगे, जबकि पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात उन्हें अलग-अलग रणनीतिक खेमों में खड़ा दिखा रहे हैं।

भारत की अध्यक्षता में होने जा रही यह बैठक इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इसमें शामिल कुछ देश इस समय West Asia conflict से सीधे या परोक्ष रूप से प्रभावित हैं। ऐसे में यह सिर्फ एक नियमित बहुपक्षीय बैठक नहीं, बल्कि India diplomacy की बड़ी परीक्षा भी बनती जा रही है।

नई दिल्ली में BRICS विदेश मंत्रियों की अहम बैठक

भारत इस समय BRICS grouping की अध्यक्षता कर रहा है और इसी क्रम में मई में BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक नई दिल्ली में आयोजित की जा रही है।

भारत ने इस बैठक के लिए जिन देशों को निमंत्रण भेजा है, उनमें शामिल हैं:

रूस
ईरान
UAE
ब्राजील
चीन
मिस्र
इथियोपिया
इंडोनेशिया
सऊदी अरब
दक्षिण अफ्रीका

इस बैठक को आगामी 17वें BRICS Summit की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है। ऐसे में नई दिल्ली की यह बैठक सिर्फ प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि आगे की geopolitical messaging तय करने वाला मंच भी हो सकती है।

क्यों खास है Iran-UAE की एक साथ मौजूदगी?

इस बैठक का सबसे दिलचस्प और संवेदनशील पहलू यह है कि Iran और UAE, जो पश्चिम एशिया की बदलती रणनीतिक राजनीति के अहम खिलाड़ी हैं, भारत की मेजबानी में एक ही मंच पर मौजूद होंगे।

हालांकि दोनों देशों के संबंध हाल के वर्षों में कुछ हद तक बेहतर हुए हैं, लेकिन West Asia power balance, regional security, Israel-Iran tensions, और US influence in the Middle East जैसे मुद्दे अब भी इस क्षेत्र की राजनीति को बेहद जटिल बनाए हुए हैं।

ऐसे में भारत की अध्यक्षता में इन देशों का एक मंच पर बैठना सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि संभावित diplomatic signaling के रूप में भी देखा जा रहा है।

BRICS अब पहले से कहीं ज्यादा बड़ा और प्रभावशाली

BRICS समूह की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई थी। लेकिन हाल के वर्षों में इसका दायरा तेजी से बढ़ा है।

BRICS Expansion के तहत:
2024 में समूह में शामिल हुए:
मिस्र
इथियोपिया
ईरान
UAE
2025 में शामिल हुआ:
इंडोनेशिया

इस विस्तार के बाद BRICS अब दुनिया की सबसे बड़ी उभरती हुई economic और geopolitical blocs में से एक बन चुका है।

अनुमान के मुताबिक, BRICS देशों की कुल आबादी करीब 3.9 अरब है, जो दुनिया की कुल जनसंख्या का लगभग 48 प्रतिशत है। इस लिहाज से BRICS सिर्फ आर्थिक मंच नहीं, बल्कि Global South diplomacy का भी बड़ा प्रतिनिधि बन चुका है।

रूस के विदेश मंत्री भी आएंगे दिल्ली

भारत में होने जा रही इस अहम बैठक को लेकर रूस की तरफ से भी पुष्टि हो चुकी है। रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको ने रूसी समाचार एजेंसी TASS को बताया है कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव इस बैठक में भाग लेने के लिए नई दिल्ली आएंगे।

रूस की मौजूदगी इस बैठक को और भी महत्वपूर्ण बनाती है, क्योंकि BRICS में मॉस्को की भूमिका हमेशा से प्रभावशाली रही है और पश्चिम एशिया समेत कई वैश्विक संकटों पर उसकी अलग रणनीतिक स्थिति रही है।

तेहरान की नजर भारत पर, क्या जारी होगा कोई औपचारिक बयान?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान की यह इच्छा है कि BRICS की मौजूदा अध्यक्षता कर रहे भारत की ओर से एक formal statement जारी किया जाए, जिसमें उसके खिलाफ अमेरिका और इजरायल की ओर से हुई कार्रवाई की निंदा की जाए।

यहीं से भारत के सामने सबसे बड़ी कूटनीतिक चुनौती खड़ी होती है।

क्योंकि एक तरफ भारत के ईरान के साथ पारंपरिक और रणनीतिक संबंध हैं, तो दूसरी ओर अमेरिका, इजरायल और UAE के साथ भी उसके मजबूत रिश्ते हैं। ऐसे में किसी एक पक्ष की भाषा अपनाना भारत के लिए आसान नहीं होगा।

भारत के सामने सबसे बड़ी मुश्किल क्या है?

भारत के लिए असली चुनौती सिर्फ बैठक आयोजित करना नहीं, बल्कि BRICS consensus तैयार करना है।

14 मार्च को भारत ने संकेत दिया था कि West Asia conflict पर BRICS देशों के बीच common position तय करना आसान नहीं है। इसकी वजह यह है कि सदस्य देशों के इस संकट को लेकर अपने-अपने national interests और strategic priorities हैं।

यानी BRICS के भीतर मौजूद कई देश इस मुद्दे को अलग-अलग नजरिए से देखते हैं। कुछ सीधे प्रभावित हैं, कुछ अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं और कुछ अपने व्यापक भू-राजनीतिक हितों के हिसाब से रुख तय कर रहे हैं।

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में कहा था कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर BRICS का साझा रुख तय करना इसलिए मुश्किल हो गया है क्योंकि समूह के कुछ सदस्य इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हैं।

उन्होंने किसी देश का नाम लिए बिना साफ किया कि भारत एक shared position तैयार करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सदस्य देशों के बीच मौजूद different viewpoints इस प्रक्रिया को जटिल बना रहे हैं।

यह बयान इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली सिर्फ मेजबान की भूमिका नहीं निभा रहा, बल्कि वह bridge-builder की भूमिका में भी सामने आना चाहता है।

भारत की कूटनीति के लिए क्यों अहम है यह बैठक?

नई दिल्ली में होने वाली यह BRICS बैठक भारत के लिए कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है:

1. Diplomatic balancing test

भारत को ईरान, UAE, रूस, अमेरिका-निकट देशों और पश्चिमी साझेदारियों के बीच संतुलन बनाना है।

2. Global South leadership

भारत खुद को लंबे समय से Global South की आवाज के तौर पर पेश करता रहा है। ऐसे में BRICS मंच पर consensus बनाना उसकी credibility को मजबूत कर सकता है।

3. West Asia engagement

भारत के लिए पश्चिम एशिया सिर्फ कूटनीति का विषय नहीं, बल्कि energy security, diaspora interests, trade routes और strategic connectivity से जुड़ा मुद्दा भी है।

4. BRICS presidency image

क्योंकि भारत इस समय BRICS की अध्यक्षता कर रहा है, इसलिए यह बैठक उसकी multilateral leadership capacity का भी परीक्षण मानी जाएगी।

क्या West Asia conflict पर कोई soft consensus बन सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS देशों के बीच इस मुद्दे पर कोई बहुत कठोर या सीधी राजनीतिक भाषा वाला बयान आना मुश्किल हो सकता है। लेकिन एक soft consensus जरूर बन सकता है, जिसमें:

तनाव कम करने की अपील
restraint की मांग
diplomacy और dialogue पर जोर
regional stability की बात
civilian safety पर चिंता

जैसी बातें शामिल हो सकती हैं।

यानी भारत शायद ऐसा रास्ता निकालने की कोशिश करे जो किसी एक पक्ष के पक्ष में खुलकर न दिखे, लेकिन BRICS को पूरी तरह बंटा हुआ भी न दिखाए।

BRICS Foreign Ministers Meeting in New Delhi इस बार सिर्फ एक रूटीन बहुपक्षीय बैठक नहीं होगी। यह भारत के लिए geopolitical balancing, West Asia diplomacy, और global leadership की असली परीक्षा बनती दिख रही है।

एक तरफ Iran और UAE जैसे देश एक ही मंच पर होंगे, दूसरी तरफ भारत के सामने यह चुनौती होगी कि वह इतने विविध हितों वाले समूह के बीच common ground कैसे तैयार करे।

नई दिल्ली में होने वाली यह बैठक आने वाले समय में न सिर्फ BRICS की दिशा, बल्कि पश्चिम एशिया को लेकर भारत की कूटनीतिक भूमिका को भी नए सिरे से परिभाषित कर सकती है।