ट्रंप का दोगलापन खुला सामने, अमेरिका चाहता था भारत से रूस का तेल खरीदना

अमेरिका और भारत के बीच रूस के तेल को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सामने आया है, जिसमें अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारत को रूस से तेल और हथियार खरीदने पर 25% टैरिफ (25% Tariff) और पेनल्टी (Penalty) की धमकी दी है। ट्रंप का आरोप है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Oil Market) में मुनाफे के लिए बेच रहा है, जिससे रूस को यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) में आर्थिक सहायता मिलती है। हालांकि, यह आरोप पूरी सच्चाई नहीं दर्शाता। भारत में पूर्व अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी (Eric Garcetti) ने पहले स्पष्ट किया था कि अमेरिका खुद चाहता था कि भारत रूस से तेल खरीदे ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) स्थिर रहे।

2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए, जिसके चलते रूस ने अपने तेल को कम कीमत पर बेचने का रास्ता अपनाया। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 80% आयात करता है, ने इस अवसर का फायदा उठाया और रूस से सस्ता तेल खरीदकर अपनी अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को सहारा दिया। अमेरिकी राजदूत गार्सेटी ने 2024 में कहा था कि भारत का यह कदम तेल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए था, जिसे अमेरिका ने समर्थन भी किया।

चीन रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार

अब ट्रंप की धमकियों और आलोचनाओं में विरोधाभास है क्योंकि वे भारत को निशाना बना रहे हैं, जबकि चीन रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार है और उस पर उतनी कड़ी कार्रवाई नहीं हो रही। इस पर भारत ने साफ कहा है कि उसकी ऊर्जा नीति (Energy Policy) राष्ट्रीय हितों और वैश्विक आर्थिक मजबूरियों पर आधारित है। विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने भी कहा है कि अमेरिका और यूरोप भी रूस से व्यापार कर रहे हैं, तो भारत पर दोगलापन क्यों?

ट्रंप की यह नीति भारत-अमेरिका संबंधों (India-US Relations) को प्रभावित कर सकती है और साथ ही वैश्विक तेल बाजार (Global Oil Market) में अस्थिरता ला सकती है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा। तेल रिफाइनरियां जैसे रिलायंस (Reliance) और नायरा (Nayara) अभी भी रूस से तेल खरीद रही हैं।

अमेरिका का यह दोहरा रवैया इस बात को दर्शाता है कि वह यूक्रेन युद्ध के बीच अपनी रणनीति (Strategic Interests) के लिए भारत को भी दबाव में लाना चाहता है, जबकि खुद रूस के साथ आर्थिक संबंध बनाए रखता है। भारत के लिए इस समय अपनी स्वतंत्र विदेश नीति (Independent Foreign Policy) और आर्थिक संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती है।