8 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा बहाली पर होगी सुनवाई: क्या बदलेगा इतिहास?

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) 8 अगस्त, 2025 को उस याचिका (Petition) पर सुनवाई करेगा जिसमें केंद्र सरकार (Central Government) से जम्मू-कश्मीर (Jammu & Kashmir) का राज्य का दर्जा (Statehood) पुनः बहाल करने की मांग की गई है। यह याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India – CJI) वीआर गवई के समक्ष प्रस्तुत की है। न्यायालय ने इसे सूची से हटाने से इनकार कर सुनवाई की तिथि तय कर दी है। यह मामला अनुच्छेद 370 (Article 370) के निरस्तीकरण से जुड़ा है, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त था।

यह याचिका उस पुराने केस की मिक्स्ड एप्लिकेशन के तौर पर दायर की गई है, जिसमें दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 हटाने को वैध ठहराया था। उस फैसले में कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की संवैधानिक वैधता पर कोई टिप्पणी नहीं की थी, क्योंकि सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया था कि राज्य का दर्जा जल्द बहाल किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि राज्य का दर्जा शीघ्र बहाल होना चाहिए, लेकिन कोई सटीक समयसीमा नहीं दी गई थी।

इस बार की याचिका कॉलेज शिक्षक जाहूर अहमद भट और सामाजिक कार्यकर्ता खुर्शीद अहमद मलिक ने एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड इजाज मकबूल के माध्यम से दायर की है। याचिकाकर्ता आरोप लगाते हैं कि लगभग 11 महीने बाद भी केंद्र सरकार ने राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है, जबकि क्षेत्र में विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) शांतिपूर्ण संपन्न हो चुके हैं।

वहीं, केंद्र सरकार की तरफ से हाल की उच्चस्तरीय बैठकों (High-level Meetings) से उम्मीदें बढ़ी हैं कि जल्द ही राज्य का दर्जा पुनः बहाल करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi), और गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) के बीच हुई बैठकें तथा एनडीए सांसदों की चर्चा ने इस संभावना को मजबूत किया है। साथ ही संसद भवन में गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, आईबी प्रमुख तपन कुमार डेका और गृह सचिव गोविंद मोहन की अहम बैठक ने भी इस मुद्दे पर सक्रियता दिखाई है।

अब सबकी निगाहें 8 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई (Supreme Court Hearing) पर टिकी हैं, जहां यह स्पष्ट होगा कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा पुनः देने के लिए क्या रणनीति अपनाती है। यह फैसला भारत के संवैधानिक इतिहास (Constitutional History) में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा।