Palestine को समर्थन देना पड़ा भारी, Trump ने Canada पर 35% Tariff ठोका

US President Donald Trump ने गुरुवार को एक Executive Order पर हस्ताक्षर कर एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया। उन्होंने Canada से आने वाले non-USMCA imports पर Tariff 25% से बढ़ाकर 35% कर दिया। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कनाडा ने हाल ही में Palestine को Independent Nation के रूप में मान्यता देने की घोषणा की थी।

व्हाइट हाउस की ओर से जारी Fact Sheet में यह भी कहा गया है कि यदि कनाडा अपने सामानों को दूसरे देशों के जरिए अमेरिका भेजता है, तो Transshipment के तहत उस पर 40% अतिरिक्त शुल्क (Duty) लगाया जाएगा।

Palestine Recognition बना तनाव का कारण

विशेषज्ञ मानते हैं कि कनाडा का फिलिस्तीन को मान्यता देना geopolitical tension को और बढ़ा सकता है। ट्रंप प्रशासन ने इसे अमेरिका की विदेश नीति के खिलाफ एकतरफा कदम बताया है, और इसी वजह से Tariff बढ़ाया गया।

 Fentanyl Smuggling पर भी गहराया विवाद

Trump की नाराज़गी की दूसरी बड़ी वजह है अमेरिका में हो रही Fentanyl smuggling। ट्रंप ने सीधे तौर पर कनाडा को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया, जबकि कनाडा का दावा है कि अमेरिका में आने वाले Fentanyl का सिर्फ एक छोटा हिस्सा ही उसकी सीमा से आता है।

Trump बोले- कनाडा से कोई बातचीत नहीं

हालाँकि Canadian PM Mark Carney ने कहा कि अमेरिका से वार्ता रचनात्मक रही है, लेकिन ट्रंप का दावा है कि “कोई meaningful dialogue नहीं हुआ।” Carney ने 1 अगस्त की deadline से पहले बातचीत पूरी होने की संभावना को भी खारिज किया।

 Counter-Tariff की तैयारी में कनाडा

कनाडा अब इस US Tariff Hike का जवाब देने की तैयारी में है। Ontario Premier Doug Ford ने अमेरिकी Steel और Aluminum पर 50% counter-tariff लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा, “Canada को अपने हितों से समझौता नहीं करना चाहिए।”

इस बीच US Commerce Secretary Howard Lutnick ने संकेत दिया कि यदि कनाडा retaliatory actions से पीछे हटता है, तो अमेरिका Tariff पर पुनर्विचार कर सकता है।

कूटनीतिक फैसलों की बड़ी कीमत

Trump की यह आक्रामक आर्थिक नीति दर्शाती है कि Foreign policy और Trade Policy अब गहराई से जुड़ चुकी हैं। Palestine को समर्थन देना Canada के लिए एक Diplomatic Stand था, लेकिन इसकी आर्थिक कीमत भी चुकानी पड़ रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देश Tariff war को कूटनीतिक स्तर पर कैसे सुलझाते हैं।