Iran-Israel War: Why is Iran not agreeing, how long will the conflict continue?
Middle East में जारी Iran Israel conflict जल्द थमने के कोई संकेत नहीं दे रहा है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने Ceasefire Talks से साफ इनकार कर दिया है और कहा है कि जब तक इजरायल के हमलों का माकूल जवाब नहीं दिया जाता, तब तक किसी भी समझौते पर विचार नहीं होगा। यह रुख न केवल क्षेत्रीय हालात को तनावपूर्ण बनाए हुए है, बल्कि global diplomacy के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
ईरान का कड़ा संदेश: जवाब के बिना नहीं होगा समझौता
Reuters की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने कतर और ओमान जैसे मध्यस्थ देशों को सूचित किया है कि वह फिलहाल Israel के हमलों के बीच किसी ceasefire proposal को स्वीकार नहीं करेगा। एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि
“ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह तब तक कोई बातचीत नहीं करेगा जब तक इजरायली आक्रामकता का जवाब नहीं दे देता।”
इस तनाव के चलते बीते तीन दिनों से दोनों देशों के बीच रॉकेट हमले और मिसाइल स्ट्राइक की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।
इजरायल का हमला और ईरान की प्रतिक्रिया
पिछले शुक्रवार को इजरायल ने ईरान पर एक बड़ा हमला किया था, जिसमें senior Iranian military official की मौत हो गई और कुछ nuclear infrastructure को नुकसान पहुंचा। इसके जवाब में ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है, जिससे full-scale military escalation की आशंका बढ़ गई है।
अमेरिका का रुख: ट्रंप ने ‘खामेनेई हत्या योजना’ को रोका
Donald Trump की अगुवाई वाले पूर्व अमेरिकी प्रशासन ने Ayatollah Ali Khamenei assassination plan को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था।
एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, इजरायल ने अमेरिका को एक targeted killing operation की योजना सौंपी थी जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई को निशाना बनाने का प्रस्ताव था।
हालांकि, व्हाइट हाउस ने इसे खारिज करते हुए कहा कि
“इस तरह की कार्रवाई से पूरा मध्य पूर्व अस्थिर हो सकता है और अमेरिका इसे समर्थन नहीं देगा।”
Trump administration ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना है, न कि पूरे क्षेत्र को युद्ध में झोंकना।
ईरान-इजरायल तनाव का वैश्विक असर
Oil prices और global trade पर असर दिखना शुरू हो गया है।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच geopolitical तनाव और बढ़ सकता है।
Middle East ceasefire talks विफल होने से संघर्ष का दायरा बढ़ने की आशंका है।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं जैसे UN और EU, इस संघर्ष में अब और सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं।