The road ends in the Gomti River, and a wide road is being built amidst the populated areas; why is there a ruckus over the LDA's planning?
Lucknow News: शहर को planned development और smart urban infrastructure देने के दावे करने वाले Lucknow Development Authority (LDA) के Master Plan 2016 की खामियां अब खुलकर सामने आने लगी हैं। ताजा समीक्षा में पता चला है कि प्लान में कई ऐसी सड़कें दिखाई गईं, जिनका जमीन पर कोई व्यावहारिक आधार नहीं है। कहीं सड़क सीधे Gomti River की ओर जाती दिख रही है, तो कहीं घनी आबादी के बीच बेहद चौड़ी proposed roads खींच दी गई हैं। इससे LDA की पुरानी urban planning प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
शासन के निर्देश पर LDA Vice Chairman Prathamesh Kumar की अध्यक्षता में बनी एक प्रदेश स्तरीय समिति जब Master Plan review कर रही है, तब यह स्पष्ट हो रहा है कि 2016 का यह खाका कई जगह ground reality से मेल ही नहीं खाता। आरोप यह भी हैं कि उस समय योजना तैयार करते वक्त वास्तविक स्थिति का ठीक से सर्वे नहीं किया गया और दफ्तर में बैठकर ही कई प्रस्ताव बना दिए गए। अब वही निर्णय शहर के विकास, नक्शों की मंजूरी और बुनियादी ढांचे से जुड़े मामलों में बाधा बनते दिख रहे हैं।
सबसे चौंकाने वाले मामलों में Kalidas Marg का उदाहरण सामने आया है। मुख्यमंत्री आवास के सामने वाले हिस्से में 24 meter wide road को इस तरह प्रस्तावित दिखाया गया कि वह आगे जाकर सीधे गोमती नदी की दिशा में खत्म होती नजर आती है। इस प्रस्ताव को देखकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसी सड़क की कल्पना किस आधार पर की गई, जो वास्तविक भूगोल और यातायात जरूरतों से मेल ही नहीं खाती। यह मामला planning error और map-based negligence का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
Ayodhya Road को लेकर भी मास्टर प्लान में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। दस्तावेजों में इसे 100 meter wide corridor के रूप में दर्शाया गया, जबकि जमीनी स्तर पर इसकी मौजूदा चौड़ाई इससे काफी कम है। ऐसी स्थिति में इसे प्लान के अनुरूप विकसित करना न केवल महंगा और कठिन है, बल्कि कई जगहों पर लगभग असंभव भी माना जा रहा है। इससे यह सवाल और मजबूत हुआ है कि क्या road width projections बिना पर्याप्त field assessment के तय किए गए थे।
इसी तरह IIM Road का मामला भी चर्चा में है। जहां वास्तविकता में करीब 60 meter road का ढांचा मौजूद है और दोनों ओर रिहायशी विकास हो चुका है, वहीं मास्टर प्लान में इस सड़क को 150 meter wide दिखा दिया गया। अब इतनी चौड़ी सड़क को जमीन पर उतारना लगभग नामुमकिन माना जा रहा है, क्योंकि इससे बड़ी संख्या में घर और आबादी प्रभावित हो सकती है। शहरी नियोजन के लिहाज से यह एक ऐसा उदाहरण है, जहाँ paper planning और existing habitation के बीच भारी टकराव दिखाई देता है।
Kanpur Road-Mohan Road corridor के आसपास भी योजना और हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। यहां पहले से राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा अपने हिसाब से सड़क निर्माण किए जाने के बाद मूल मास्टर प्लान की रूपरेखा अप्रासंगिक हो गई। इसके बावजूद बाद में पास में 150 meter inner road का प्रस्ताव जोड़ दिया गया। नतीजा यह हुआ कि क्षेत्र में development process अटकने लगी, लोगों के building maps पास होने में दिक्कतें आने लगीं और local level पर uncertainty बढ़ गई।
Sitapur Road के पास Srishti Apartment के पीछे भी इसी तरह की योजना दिखाई गई, जहां घनी आबादी के बावजूद 150 meter wide road proposal दर्ज कर दिया गया। मौजूदा बस्ती और जमीन की उपलब्धता को देखते हुए यह प्रस्ताव बेहद अव्यवहारिक माना जा रहा है। ऐसे मामलों से साफ है कि कई हिस्सों में land use planning, transport planning और वास्तविक शहरी विस्तार के बीच संतुलन नहीं बनाया गया।
पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब उंगली उन अधिकारियों पर उठ रही है, जिन्होंने 2016 में इस मास्टर प्लान को तैयार किया था। आरोप है कि उन्होंने मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का पर्याप्त अध्ययन नहीं किया और कागजों पर एक ऐसी शहर की तस्वीर बना दी, जिसे जमीन पर लागू करना लगभग असंभव है। इसी वजह से आज यह Lucknow master plan controversy सिर्फ तकनीकी गलती का मामला नहीं रह गया, बल्कि administrative accountability का भी प्रश्न बन गया है।
अब प्रदेश स्तरीय समिति इन खामियों को चिन्हित कर सुधार की दिशा में काम कर रही है। इस समिति में LDA उपाध्यक्ष के अलावा Ghaziabad Development Authority के उपाध्यक्ष, प्रदेश के Chief Town and Country Planner, Awas Bandhu के निदेशक समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। माना जा रहा है कि समीक्षा पूरी होने के बाद ऐसे प्रस्तावों को बदला जा सकता है, जो जमीनी स्थिति से मेल नहीं खाते। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि Master Plan correction की यह प्रक्रिया लखनऊ के विकास को कितनी राहत दे पाती है।