Yogi government's major decision for business parks in UP; land to be available on a 45-year lease.
UP Business Park Policy: उत्तर प्रदेश में Business Park Development को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार ने निजी डेवलपर्स के लिए नई नीति जारी की है। इसके तहत निजी कंपनियां और औद्योगिक समूह प्रदेश में बिजनेस पार्क विकसित कर सकेंगे। सरकार की ओर से जमीन और जरूरी संसाधनों की व्यवस्था की जाएगी। खास बात यह है कि निजी डेवलपर्स को जमीन 45 साल की Lease पर दी जाएगी, जिसे आगे 45 साल के लिए बढ़ाया जा सकेगा। इस तरह अधिकतम 90 साल तक जमीन का उपयोग किया जा सकेगा।
निजी डेवलपर्स के लिए खुला बिजनेस पार्क का रास्ता
उत्तर प्रदेश सरकार का उद्देश्य राज्य में Industrial Development, Investment और Employment Generation को बढ़ावा देना है। नई नीति के तहत बिजनेस कंसोर्टियम, Real Estate Investment Trust (REIT) और Listed Companies बिजनेस पार्क विकसित कर सकेंगी।
इसके लिए पात्र कंपनियों की नेटवर्थ कम से कम 1,000 करोड़ रुपये होनी चाहिए। साथ ही पिछले तीन वित्तीय वर्षों में औसत वार्षिक टर्नओवर कम से कम 500 करोड़ रुपये होना जरूरी है। रियल एस्टेट डेवलपमेंट और कॉमर्शियल बिजनेस में कम से कम सात साल का अनुभव रखने वाले औद्योगिक समूहों को भी इस योजना में अवसर मिलेगा।
45 साल की लीज, फिर 45 साल का एक्सटेंशन
नई UP Business Park Policy में जमीन की लीज अवधि निवेशकों के लिए खास आकर्षण है। निजी डेवलपर्स को जमीन 45 साल के पट्टे पर उपलब्ध कराई जाएगी। जरूरत और निर्धारित नियमों के मुताबिक इसे अगले 45 साल के लिए बढ़ाया जा सकेगा।
यानी डेवलपर को लंबे समय तक प्रोजेक्ट संचालित करने का अवसर मिलेगा। दूसरे कई राज्यों में बिजनेस पार्क के लिए जमीन की लीज अवधि करीब 30 से 35 वर्ष तक बताई गई है।
कम से कम 10 एकड़ में बनेगा बिजनेस पार्क
नीति के अनुसार बिजनेस पार्क का न्यूनतम क्षेत्रफल 10 एकड़ होगा। जरूरत के अनुसार इसे 20 से 30 एकड़ तक बढ़ाया जा सकता है। 10 एकड़ तक के बिजनेस पार्क को तीन साल के भीतर विकसित करना होगा।
इसमें IT Companies, Global Capability Centres (GCC) और Knowledge-Based Services के लिए कम से कम 50 फीसदी क्षेत्र आरक्षित रखना होगा। इससे प्रदेश में टेक्नोलॉजी, डिजिटल सर्विस और नॉलेज सेक्टर से जुड़े निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
फूड कोर्ट और रिटेल आउटलेट के लिए भी जगह
बिजनेस पार्क में सिर्फ ऑफिस या कंपनियों के लिए जगह नहीं होगी। नीति के तहत अधिकतम 10 फीसदी क्षेत्र में Food Court, Retail Outlets और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी।
बाकी हिस्से में Training Centre और Skill Development Centre जैसी सुविधाएं विकसित करने की व्यवस्था होगी। इसका उद्देश्य उद्योगों की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षित और कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाना है।
सरकार देगी जमीन, Single Window System से मंजूरी
निजी बिजनेस पार्क विकसित करने के लिए सरकार की ओर से भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए औद्योगिक विकास प्राधिकरण के माध्यम से उपयुक्त जमीन चिह्नित की जाएगी और Auction Process के जरिए निजी डेवलपर्स को जमीन दी जाएगी।
निवेशकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए Single Window System के जरिए जरूरी अनुमोदन और स्वीकृतियां देने की व्यवस्था की गई है।
स्टांप ड्यूटी में 100 फीसदी छूट
नई नीति के तहत बिजनेस पार्क विकसित करने वाली कंपनी को जमीन के रजिस्ट्रेशन पर 100% Stamp Duty Exemption का लाभ मिलेगा। इसके अलावा न्यूनतम अग्रिम भूमि प्रीमियम 5 फीसदी और राजस्व हिस्सेदारी 7 प्रतिशत निर्धारित की गई है।
डेवलपर को प्रोजेक्ट के लिए जरूरी NOC, Approvals और Permits हासिल करने होंगे। साथ ही भवन उपविधियों के अनुसार लेआउट, आर्किटेक्चर और डिजाइन तैयार करना होगा।
युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते
सरकार की इस पहल से उत्तर प्रदेश में Business Investment, IT Sector, Commercial Development और Job Creation को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। खासकर IT, GCC और Knowledge-Based Companies के लिए जगह आरक्षित होने से युवाओं के लिए रोजगार और स्किल डेवलपमेंट के नए अवसर तैयार हो सकते हैं।