A new era for Sanskrit! Governor Gurmit Singh speaks of integrating it with AI and technology.
उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने शनिवार को हरिद्वार स्थित उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा में संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने संस्कृत को केवल प्राचीन विरासत तक सीमित रखने के बजाय इसे आधुनिक तकनीक, शोध और भविष्य की जरूरतों से जोड़ने पर जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत में मौजूद वैज्ञानिक संरचना और विशाल साहित्य आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।
AI और Machine Learning में संस्कृत की संभावनाएं
राज्यपाल ने कहा कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल टेक्नोलॉजी, Linguistics और Machine Learning जैसे क्षेत्रों में संस्कृत को लेकर व्यापक शोध की संभावनाएं हैं। भाषा की वैज्ञानिक संरचना और व्याकरण को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर नए शोध और नवाचार किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि संस्कृत को केवल पुस्तकालयों, पुरानी पांडुलिपियों और पारंपरिक अध्ययन तक सीमित रखने की जरूरत नहीं है। इसे Digital World, Research Labs और Global Knowledge Platforms तक पहुंचाने के लिए नई पहल जरूरी है।
संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण कड़ी
राज्यपाल ने संस्कृत के महत्व पर कहा कि यह केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान और चिंतन परंपरा का महत्वपूर्ण माध्यम रही है। वेद, उपनिषद, दर्शन, व्याकरण, आयुर्वेद और योग जैसे विषयों का बड़ा ज्ञान-साहित्य संस्कृत में उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि संस्कृत व्यक्ति को केवल भाषा का ज्ञान नहीं देती, बल्कि जीवन, कर्तव्य, विवेक और मानव कल्याण को समझने की दृष्टि भी प्रदान करती है।
संस्कृत छात्रों के लिए करियर के नए अवसर
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत की पढ़ाई के बाद करियर के विकल्प अब केवल अध्यापन तक सीमित नहीं हैं। Translation, Research, Indian Philosophy, Culture, Publishing, Digital Media और Language Technology जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा को रोजगार, तकनीक, शोध और Innovation से जोड़ना वर्तमान समय की जरूरत है। दीक्षांत समारोह में उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से जीवन में आगे बढ़ने के लिए पांच संकल्प लेने का भी आह्वान किया।
चार लोगों को मानद उपाधि से किया सम्मानित
समारोह के दौरान राज्यपाल ने लोक गायिका पद्मश्री माधुरी बड़थ्वाल, डॉ. अनुसूया प्रसाद पंत, प्रो. राम कुमार शर्मा और श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय को मानद उपाधियों से सम्मानित किया।
वहीं, विश्वविद्यालय को करीब 10 हजार दुर्लभ पुस्तकों और पत्र-पत्रिकाओं का संग्रह उपलब्ध कराने के लिए पद्मश्री अभिराज राजेन्द्र मिश्र के प्रति आभार जताया गया।
‘अभिराज-पुस्तक-वीथी’ के रूप में संरक्षित होंगे दुर्लभ ग्रंथ
राज्यपाल ने कहा कि इन दुर्लभ पुस्तकों और ग्रंथों को ‘अभिराज-पुस्तक-वीथी’ के रूप में संरक्षित किया जाना आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण ज्ञान-संपदा साबित होगा। इससे विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े
दुर्लभ साहित्य तक पहुंच मिल सकेगी।
युवाओं से ज्ञान और संस्कार को समाज से जोड़ने की अपील
राज्यपाल ने डिग्री और स्वर्ण पदक हासिल करने वाले सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शिक्षा पूरी होने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह जीवन के एक नए चरण की शुरुआत का अवसर है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान, संस्कार और युवा ऊर्जा का इस्तेमाल समाज और राष्ट्र की जरूरतों के लिए करने की अपील की। राज्यपाल के अनुसार इन तीनों शक्तियों को सकारात्मक दिशा देना प्रत्येक युवा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।