UP Primary Teacher Recruitment: Hopes of Shiksha Mitras dashed; no mention of weightage.
उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में लंबे इंतजार के बाद 11,508 सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई है। हालांकि, इस भर्ती के विज्ञापन ने प्रदेश के करीब 1.42 लाख शिक्षामित्रों की चिंता बढ़ा दी है। विज्ञापन में शिक्षामित्रों को 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु तक आवेदन करने के योग्य बताया गया है, लेकिन उन्हें अनुभव के आधार पर मिलने वाले भारांक यानी वेटेज का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।
शिक्षामित्रों का कहना है कि पिछली शिक्षक भर्तियों में उन्हें उनके अनुभव के आधार पर अतिरिक्त अंक दिए गए थे। ऐसे में इस बार भी वेटेज मिलने की उम्मीद थी। विज्ञापन में इसका प्रावधान नहीं होने से शिक्षामित्र संगठनों में नाराजगी है।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का हवाला
शिक्षामित्रों के वेटेज का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले से भी जुड़ा हुआ है। राम शरण मौर्य मामले में शीर्ष अदालत ने 18 नवंबर 2020 को आदेश दिया था कि शिक्षामित्रों को अगली चयन प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा करने का एक और अवसर दिया जाए।
हालांकि, अदालत ने यह तय करने का अधिकार राज्य सरकार पर छोड़ा था कि शिक्षामित्र इस अवसर का इस्तेमाल किस प्रक्रिया या व्यवस्था के तहत करेंगे। इसी वजह से मौजूदा भर्ती में वेटेज दिए जाने को लेकर कानूनी और प्रशासनिक स्थिति को लेकर चर्चा बनी हुई है।
पिछली भर्तियों में मिला था भारांक
जुलाई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने करीब 1.37 लाख शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन रद्द कर दिया था। इसके बाद खाली हुए पदों को भरने के लिए 68,500 और 69,000 शिक्षक भर्ती आयोजित की गई थी।
इन दोनों भर्तियों में शिक्षामित्रों को उनके अनुभव के आधार पर भारांक दिया गया था। अलग-अलग भर्ती में यह भारांक 10 से 25 अंकों तक रहा। इसी आधार पर शिक्षामित्रों को उम्मीद थी कि 11,508 पदों वाली नई भर्ती में भी उनके अनुभव का लाभ दिया जाएगा।
पिछली दो भर्तियों में कितने शिक्षामित्र बने शिक्षक?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 68,500 शिक्षक भर्ती में करीब 7 हजार और 69,000 शिक्षक भर्ती में लगभग 8 हजार शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति मिल सकी थी।
शिक्षामित्रों का कहना है कि लंबे समय तक प्राथमिक विद्यालयों में काम करने के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षामित्र अब भी नियमित शिक्षक बनने का इंतजार कर रहे हैं।
90 हजार से ज्यादा शिक्षामित्र पास कर चुके हैं TET
शिक्षामित्रों से जुड़े संगठनों के अनुसार, अब तक 90 हजार से अधिक शिक्षामित्र शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET पास कर चुके हैं। उनका तर्क है कि वे लंबे समय से शिक्षक पद के समान काम कर रहे हैं और आवश्यक शैक्षणिक योग्यता भी रखते हैं।
इसी आधार पर शिक्षामित्रों का एक वर्ग चाहता है कि नई भर्ती में उनके अनुभव को महत्व देते हुए वेटेज दिया जाए। हालांकि, मौजूदा भर्ती विज्ञापन में भारांक के संबंध में स्पष्ट प्रावधान नहीं होने से उनकी उम्मीदों को झटका लगा है।
शिक्षामित्र संघ ने उठाई वेटेज की मांग
उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि लंबे समय तक सेवा देने के बाद भी शिक्षामित्रों को शिक्षक भर्ती में अनुभव का लाभ नहीं मिलना उनके साथ अन्याय है। उनका कहना है कि शिक्षामित्रों को नई भर्ती में उनके अनुभव के आधार पर भारांक दिया जाना चाहिए।
शिक्षामित्र संगठनों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक प्राथमिक विद्यालयों में सेवाएं दी हैं। इसलिए नई शिक्षक भर्ती में उनके अनुभव को चयन प्रक्रिया में उचित महत्व मिलना चाहिए।
अब क्या होगा?
11,508 सहायक अध्यापक पदों की भर्ती में शिक्षामित्रों के लिए आवेदन का रास्ता खुला है, लेकिन वेटेज को लेकर विज्ञापन में स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में शिक्षामित्रों की नजर आगे होने वाले सरकारी निर्णय और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े निर्देशों पर है।
फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि शिक्षामित्रों को किसी भी परिस्थिति में वेटेज नहीं मिलेगा, क्योंकि इस मुद्दे पर आगे सरकार या संबंधित प्राधिकारी की ओर से कोई स्पष्टीकरण या निर्णय आ सकता है। मौजूदा विज्ञापन में भारांक का उल्लेख नहीं होने के कारण यह मुद्दा शिक्षामित्रों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।