ममता बनाम रितब्रत: TMC के नाम और ‘जोड़ा फूल’ पर आज EC की सुनवाई, फैसले पर नजर

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम, संगठन और चुनाव चिह्न को लेकर ममता बनर्जी और रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट आमने-सामने हैं। दोनों पक्ष खुद को पार्टी का अधिकृत प्रतिनिधि बता रहे हैं। इस विवाद के बीच चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से अतिरिक्त दस्तावेज और अंतिम पक्ष मांगा है। अब 17 सितंबर को आयोग की सुनवाई पर सबकी नजर है। हालांकि, आयोग ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि उसी दिन अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।

TMC के नाम और ‘जोड़ा फूल’ पर विवाद

विवाद मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ के इस्तेमाल को लेकर है। दोनों गुट आगामी विधानसभा उपचुनाव में इसी नाम और चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरने का दावा कर रहे हैं।

चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी हैं और संगठन से जुड़े दावों के समर्थन में दस्तावेज मांगे हैं। आयोग फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से पेश किए गए दावों और कागजात की जांच कर रहा है।

17 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से 16 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक अंतिम पक्ष और अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने को कहा था। इसके बाद 17 सितंबर को दोनों पक्षों को फिर सुनवाई के लिए बुलाया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, यह विवाद 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनावों से पहले काफी अहम हो गया है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आयोग पार्टी के नाम और मौजूदा चुनाव चिह्न को लेकर क्या व्यवस्था करता है। फिलहाल किसी गुट को आधिकारिक रूप से TMC के नाम और ‘जोड़ा फूल’ का अंतिम अधिकार दिए जाने का फैसला सामने नहीं आया है।

दोनों गुटों ने उतारे उम्मीदवार

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। दूसरी ओर, रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट भी दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवारों के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर चुका है।

इससे दोनों गुटों के बीच सीधा चुनावी मुकाबला होने की स्थिति बन गई है। हालांकि, दोनों पक्षों के उम्मीदवारों और उनके चुनाव चिह्न से जुड़ा अंतिम सवाल चुनाव आयोग के निर्णय से ही स्पष्ट होगा।

पार्टी कार्यालयों पर भी बढ़ा विवाद

नाम और चुनाव चिह्न का विवाद अब पार्टी कार्यालयों तक भी पहुंच चुका है। हाल में रितब्रत गुट के नेताओं ने बहारमपुर स्थित TMC कार्यालय पर अपने नियंत्रण का दावा किया। इससे पहले कोलकाता में पार्टी मुख्यालय को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच विवाद सामने आया था।

रितब्रत गुट का कहना है कि वह संगठन पर अपने दावे के समर्थन में पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों और संगठनात्मक दस्तावेजों को आधार बना रहा है। वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट भी पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा कायम रखे हुए है। दोनों पक्षों के दावों पर अंतिम निर्णय चुनाव आयोग को करना है।

उपचुनाव से पहले बढ़ी अहमियत

नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। नामांकन की अंतिम तारीख 16 सितंबर थी। ऐसे में TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर आयोग का निर्णय दोनों गुटों के लिए चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

फिलहाल चुनाव आयोग के सामने दोनों पक्षों के दावे और दस्तावेज हैं। 17 सितंबर की सुनवाई के बाद आयोग क्या अंतरिम व्यवस्था करता है या अंतिम निर्णय की दिशा में आगे बढ़ता है, इस पर अब नजर बनी हुई है।