West Asia crisis पर पीएम मोदी ने कहा- हमारा पक्ष सिर्फ भारत का हित, शांति और संवाद

Middle East tension और Iran war को लेकर उठ रहे सवालों के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पहली बार बेहद स्पष्ट शब्दों में भारत का रुख सामने रखा है। उन्होंने कहा कि दुनिया भले कई गुटों में बंटी हुई दिखाई दे रही हो, लेकिन भारत की प्राथमिकता किसी खेमे के साथ खड़ा होना नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हित, शांति और संवाद को आगे बढ़ाना है। प्रधानमंत्री के शब्दों में, “हम भारत के साथ हैं।”

सोमवार को एक निजी न्यूज चैनल के कार्यक्रम में बोलते हुए पीएम मोदी ने घरेलू राजनीति से लेकर global geopolitics तक कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस और पूर्ववर्ती UPA government पर भी तीखा हमला बोला। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि अतीत में लिए गए कुछ फैसले देशहित से ज्यादा राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर किए गए, जिनका बोझ बाद की पीढ़ियों को उठाना पड़ा।

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने खास तौर पर oil bonds का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 2004 से 2010 के बीच बड़ी मात्रा में तेल बांड जारी किए गए, ताकि तत्काल राजनीतिक दबाव कम किया जा सके। उनके अनुसार, उस समय ईंधन कीमतों का संकट था, लेकिन स्थायी समाधान के बजाय ऐसा रास्ता चुना गया, जिसका वित्तीय बोझ आगे चलकर काफी बढ़ गया। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि इन बांडों का भुगतान और ब्याज मिलाकर बाद के वर्षों में बहुत बड़ी रकम के रूप में सामने आया।

प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे को सिर्फ आर्थिक सवाल नहीं, बल्कि policy accountability और governance approach से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के फैसलों का असर केवल उस समय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह आने वाले वर्षों की fiscal planning और सरकारी खर्चों को भी प्रभावित करता है। इसी संदर्भ में उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी सरकार को पुराने फैसलों का असर भी संभालना पड़ा।

हालांकि, उनके बयान का सबसे अहम हिस्सा West Asia conflict और भारत की foreign policy position से जुड़ा रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक माहौल में कई देशों के बीच विभाजन और तनाव दिख रहा है, लेकिन भारत ने अलग-अलग क्षेत्रों और विचारधाराओं वाले देशों के साथ संतुलित और भरोसेमंद रिश्ते बनाए हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खाड़ी देशों से लेकर पश्चिमी देशों और Global South तक भारत ने अपनी विश्वसनीयता मजबूत की है।

पीएम मोदी ने कहा कि कई लोग पूछते हैं कि इस संघर्षपूर्ण माहौल में भारत किसके साथ है। इस पर उन्होंने साफ जवाब दिया कि भारत किसी बाहरी खेमेबंदी की राजनीति से नहीं, बल्कि India’s national interest, peace diplomacy और dialogue-based approach से guided है। उन्होंने कहा कि भारत का पक्ष वही है, जिसमें देश का हित सुरक्षित रहे और क्षेत्रीय व वैश्विक शांति को बढ़ावा मिले।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक संघर्षों और तनाव के कारण supply chain disruption, energy security, और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता जैसे मुद्दे लगातार चुनौती बने हुए हैं। इसके बावजूद भारत ने diversification और resilience के जरिए अपनी स्थिति को अपेक्षाकृत संतुलित बनाए रखा है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, ऊर्जा, उर्वरक और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है, ताकि आम नागरिकों पर कम से कम असर पड़े।

कोरोना महामारी के बाद के दौर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया ने लगातार संकट देखे हैं, लेकिन भारत ने हर चुनौती के बीच अपने crisis management, decision-making capacity, और diplomatic outreach की ताकत दिखाई है। हाल के हफ्तों में बढ़ी अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के बावजूद भारत ने संयमित और व्यावहारिक नीति अपनाई है। प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि यही कारण है कि आज भारत की रणनीति को दुनिया गंभीरता से देख रही है।

कुल मिलाकर, पीएम मोदी का संदेश यह था कि Iran-Israel tension, West Asia crisis, और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत किसी एक धुरी के साथ खुद को सीमित नहीं कर रहा। भारत का फोकस साफ है — strategic autonomy, राष्ट्रीय हित, शांति, संवाद और स्थिरता। यही भारत की मौजूदा foreign policy doctrine की सबसे अहम पहचान बनकर सामने आई है।