क्यों माना जाता है कमलेश्वर महादेव मंदिर को संतान प्राप्ति का सिद्धपीठ? जानें अनुष्ठान की पूरी प्रक्रिया

श्रीनगर (Pauri Garhwal): उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जनपद स्थित प्रसिद्ध Kamleshwar Mahadev Mandir में आगामी 4 नवंबर को Baikunth Chaturdashi के पावन अवसर पर पारंपरिक Khada Diya Anushthan का आयोजन होगा।
इस ancient and divine ritual में देशभर से दंपति Santan Prapti (child blessing) की कामना लेकर भाग लेते हैं। इस वर्ष अब तक 140 से अधिक दंपति इस अनुष्ठान के लिए registration करवा चुके हैं।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, इच्छुक दंपति 4 नवंबर की शाम तक पंजीकरण करा सकते हैं।

देशभर से पहुंचे श्रद्धालु दंपति

मंदिर के महंत Ashutosh Puri ने बताया कि इस वर्ष अब तक Bangalore, Delhi, Maharashtra, Punjab, Haryana, Noida और Uttarakhand के लगभग 15 स्थानीय दंपति ने इस विशेष पूजा के लिए पंजीकरण कराया है।
उन्होंने बताया कि पिछले साल 145 दंपति, जबकि साल 2023 में 200 से अधिक दंपति इस अनुष्ठान में शामिल हुए थे।
यह परंपरा Kartik Shukla Chaturdashi की रात भगवान शिव की आराधना से जुड़ी है, जब couples संतान की प्राप्ति के लिए Lord Shiva से आशीर्वाद मांगते हैं।

खड़ा दीया अनुष्ठान की प्रक्रिया (Ritual Process)

इस spiritual ritual की विधि अत्यंत विशिष्ट और प्रतीकात्मक मानी जाती है।

अनुष्ठान के दौरान महिलाओं की कमर में एक कपड़े की पोटली बांधी जाती है, जिसमें जुड़वा नींबू, श्रीफल, पंचमेवा और चावल रखे जाते हैं।

इसके बाद महंत द्वारा हर दंपति के हाथ में दीपक (Diya) रखा जाता है।

दंपति पूरी रात जले हुए दीपक को हाथ में थामे भगवान शिव की आराधना (worship) करते हैं।

यह अनुष्ठान श्रद्धा, संयम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।

आस्था और पौराणिक मान्यता (Mythological Significance)

पौराणिक कथा के अनुसार, Lord Vishnu ने Kamleshwar Mahadev Temple (Srinagar) में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तप किया था। उन्होंने शिव के सहस्रनाम (1000 names) के साथ 1000 कमल पुष्प अर्पित करने का संकल्प लिया।

लेकिन भगवान शिव ने उनकी भक्ति की परीक्षा लेने के लिए एक कमल पुष्प छिपा दिया। जब विष्णु जी ने देखा कि एक कमल कम है, तो उन्होंने बिना संकोच अपनी एक आंख को कमल के स्थान पर अर्पित कर दिया।
उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अमोघ सुदर्शन चक्र का वरदान दिया।

कहते हैं कि उसी समय एक दंपति यह दिव्य लीला देख रहा था। मां पार्वती के अनुरोध पर भगवान शिव ने उस दंपति को संतान का आशीर्वाद दिया।
तब से हर साल Baikunth Chaturdashi के दिन यहां Khada Diya Anushthan किया जाता है, जिसमें childless couples संतान प्राप्ति की कामना करते हैं।