क्यों अमेरिका भारतीय किसानों पर डाल रहा है दबाव? 25% Tariff और फेल होती ट्रेड डील के पीछे की असली वजह
भारत और अमेरिका के बीच चल रही Free Trade Agreement (FTA) वार्ता फिर से पटरी से उतर गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 अगस्त से भारतीय वस्तुओं पर 25% Import Tariff लगाने की घोषणा कर दी है। इसका सबसे बड़ा असर भारतीय किसानों और छोटे उद्योगों पर पड़ने वाला है।
ट्रंप का बड़ा हमला – “भारत हमारा दोस्त है, लेकिन…”
ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर लिखा –
“भारत हमारा मित्र है, लेकिन उनके टैरिफ दुनिया में सबसे ज़्यादा हैं। भारत रूस से ऊर्जा लेता है और रूस को यूक्रेन में मारकाट से नहीं रोकता। इसलिए भारत पर 25% शुल्क लगेगा और जुर्माना भी।”
कृषि को लेकर क्यों भिड़ गए भारत-अमेरिका?
अमेरिका चाहता है कि भारत अपने agriculture और dairy sector को विदेशी कंपनियों के लिए खोले। लेकिन भारत का साफ कहना है कि 1.4 अरब की आबादी में लगभग 50% लोग कृषि पर निर्भर हैं — ऐसे में विदेशी सस्ते और heavily subsidised उत्पादों से उनकी आजीविका खत्म हो सकती है।
अमेरिका की मांगें क्या हैं?
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मक्का, सोयाबीन, गेहूं, एथेनॉल पर टैरिफ घटाओ
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डेयरी और मीट मार्केट खोलो
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GM crops पर रोक हटाओ
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Alcohol, vehicles, pharma, और medical devices में अमेरिकी पहुंच बढ़ाओ
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Data privacy, patent laws और digital trade के नियम ढीले करो
भारत का जवाब?
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GM फसलों पर रोक नहीं हटेगी
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सब्सिडी वाला अमेरिका कृषि उत्पाद भारत के लिए खतरा
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गरीब किसानों को competition में डालना उचित नहीं
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Indian MSMEs और फार्मा पर असर पड़ेगा
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घरेलू कानून और खाद्य सुरक्षा को दांव पर नहीं लगाया जा सकता
कौन है असली नुकसान में?
ट्रंप का कहना है कि भारत MFN देशों पर औसतन 39% टैरिफ लगाता है, जबकि अमेरिका सिर्फ 5%। भारत ने कुछ अमेरिकी रक्षा और ऊर्जा उत्पादों पर रियायतें दी हैं, लेकिन अमेरिका की मुख्य माँगें अब भी अटकी हैं।
भारत में किसान सिर्फ वोटर नहीं, सत्ता का संतुलन हैं
भारत की 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में भले कृषि का हिस्सा मात्र 16% हो, लेकिन किसानों का वोटबैंक सबसे बड़ा है। यही कारण है कि मोदी सरकार पहले भी Farm Laws के मामले में पीछे हटी थी।
अब अगर अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में आए, तो
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घरेलू कीमतें गिरेंगी
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किसान आंदोलन की आशंका
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विपक्ष को बैठे-बिठाए मुद्दा मिल जाएगा