Who was Abdul Rauf Azhar: उस चेहरे की कहानी जिसने डेनियल पर्ल को मरवाया”

डेनियल पर्ल एक अमेरिकी पत्रकार थे, जो Wall Street Journal के South Asia Bureau Chief के रूप में कार्यरत थे। उनका जन्म 10 अक्टूबर 1963 को अमेरिका के न्यू जर्सी में हुआ था। Stanford University से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता में कदम रखा और investigative journalism में तेजी से पहचान बनाई।

9/11 terror attacks के बाद, डेनियल को भारत के मुंबई में South Asia के लिए तैनात किया गया। वे आतंकवाद, विशेष रूप से Al-Qaeda जैसे नेटवर्क्स पर रिसर्च कर रहे थे। जनवरी 2002 में एक रिपोर्टिंग असाइनमेंट के सिलसिले में वे पाकिस्तान के कराची गए, लेकिन वहां उन्हें एक फर्जी interview के नाम पर फंसाकर kidnap कर लिया गया।

Karachi Kidnapping: जब journalism बन गई जानलेवा

23 जनवरी 2002 को डेनियल पर्ल को कराची में आतंकियों ने अगवा कर लिया। उन्होंने अपनी तस्वीरें हथकड़ी और जंजीरों में जारी कीं और अमेरिकी सरकार से मांगें रखीं – Guantanamo Bay में बंद आतंकियों की रिहाई और अमेरिकी पत्रकारों पर पाकिस्तान में बैन।

इनकार के बाद, 1 फरवरी को उनकी brutal हत्या कर दी गई। बाद में, Al-Qaeda leader Khalid Sheikh Mohammed ने स्वीकारा कि उसने खुद डेनियल का सिर कलम किया था। ये घटना दुनिया भर के पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के लिए एक गहरा सदमा थी।

ऑपरेशन सिंदूर: India ने 23 साल बाद किया justice deliver

मई 2025 में Indian Army ने एक high-level targeted mission “Operation Sindoor” को execute किया। इस मिशन में जैश-ए-मोहम्मद के top commander Abdul Rauf Azhar को पाकिस्तान के बहावलपुर में मार गिराया गया।

Abdul Rauf Azhar, जो Masood Azhar का छोटा भाई था, को Daniel Pearl की हत्या का key conspirator माना जाता था। वह भारत के कई major terror attacks में भी शामिल रहा, जैसे:

  • 1999 Kandahar Hijacking (IC-814)

  • 2001 Indian Parliament Attack

  • 2016 Pathankot Attack

  • 2019 Pulwama Bombing

अमेरिका ने 2010 में उसे Global Terrorist घोषित किया था। लेकिन पाकिस्तान उसे लंबे समय से सुरक्षा देता रहा। आखिरकार Indian Armed Forces ने उसे मार गिराया, जिसे “Justice After 23 Years” कहा जा रहा है।

Jewish Community ने भारत को कहा – Thank You

Daniel Pearl एक यहूदी थे और उनकी हत्या को international Jewish organizations ने hate crime भी माना था। Indian Army की इस decisive action के बाद Jewish community ने openly India को support और appreciation दिया।

Social media platform X (formerly Twitter) पर कई international Jewish users ने कहा –
“India did what the US could not.”
“Justice has finally been served for Daniel Pearl. Thank you India.”

अमेरिका के कई Jewish leaders ने भी इस mission को Indo-US ties के लिए एक नया chapter बताया, जहां दोनों देशों की joint fight against terrorism और मजबूत होगी।