जब दरवाजे पर खड़ा था एक साधु, किसी ने नहीं सोचा था कि वह घर का खोया बेटा है

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने पूरे इलाके को भावुक कर दिया है। लगभग 46 साल पहले अपने घर से लापता हुआ एक किशोर अचानक साधु के रूप में अपने गांव लौट आया। यह Emotional Reunion न केवल उसके परिवार बल्कि पूरे गांव के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था।

15 साल की उम्र में छोड़ा था घर

पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले की सीमा के पास स्थित दौलीगढ़ गांव का रहने वाला बुधी बल्लभ वर्ष 1980 में महज 15 साल की उम्र में घर छोड़कर चला गया था। इसके बाद परिवार को उसके बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी।

उसके पिता तारा दत्त उपाध्याय ने वर्षों तक अपने बेटे की तलाश की। रिश्तेदारों, परिचितों और विभिन्न स्थानों पर खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। आखिरकार बेटे की वापसी का इंतजार करते-करते वर्ष 2005 में उनका निधन हो गया।

61 साल की उम्र में गांव पहुंचा खोया बेटा

4 जून को गांव के लोगों ने एक साधु को गांव में आते देखा। शुरुआत में किसी को अंदाजा नहीं था कि यह वही व्यक्ति है जो दशकों पहले लापता हो गया था। बाद में जब उसकी पहचान हुई तो पूरा गांव हैरान रह गया।

अब 61 वर्षीय यह व्यक्ति “बुद्ध नाथ” के नाम से जाना जाता है। वर्षों पहले घर छोड़ने वाला किशोर अब एक साधु के रूप में अपने पैतृक गांव लौटा था।

मां से मांगी भिक्षा, पूरा हुआ गुरु का आदेश

बुद्ध नाथ ने गांववालों को बताया कि उनके गुरु का चार साल पहले निधन हो गया था। गुरु ने मृत्यु से पहले उन्हें एक विशेष निर्देश दिया था कि वे अपने जन्मस्थान वापस जाएं और अपनी मां के हाथों से भिक्षा ग्रहण करें।

गुरु की इसी अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए वह अपने गांव पहुंचे थे। उन्होंने अपनी बुजुर्ग मां नंदी देवी से भिक्षा ली और आशीर्वाद प्राप्त किया।

46 साल बाद बेटे को देखकर भावुक हुई मां

करीब आधी सदी बाद बेटे को अपने सामने देखकर नंदी देवी भावुक हो गईं। परिवार के अन्य सदस्य और ग्रामीण भी इस अनोखे मिलन के साक्षी बने। गांव में लंबे समय तक इसी घटना की चर्चा होती रही।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। जिस बेटे के लौटने की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी, वह अचानक गांव लौट आया।

पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी कहानी

यह Rare Reunion और Human Interest Story सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है। लोग मां-बेटे के इस भावुक मिलन को जीवन की सबसे प्रेरणादायक घटनाओं में से एक बता रहे हैं।

हालांकि बुद्ध नाथ अपने गांव में स्थायी रूप से रहने नहीं आए थे। उन्होंने केवल अपने गुरु की अंतिम इच्छा पूरी की और परिवार से मिलकर आशीर्वाद लिया। लेकिन उनकी इस वापसी ने 46 वर्षों से अधूरी एक कहानी को पूरा कर दिया।