CBSE Result पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोला- बच्चे के करियर का सवाल है

कक्षा 12वीं के Improvement Examination के परिणाम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से जवाब तलब किया है। अदालत ने सऊदी अरब में रहने वाले एक छात्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मामला एक बच्चे के करियर और भविष्य से जुड़ा है, इसलिए इसमें देरी नहीं होनी चाहिए।

याचिकाकर्ता छात्र प्रांशु जिगरकुमार पटेल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर CBSE को अपना Class 12 Improvement Result घोषित करने का निर्देश देने की मांग की है। छात्र का कहना है कि पश्चिम एशिया के कई देशों में सुरक्षा कारणों और युद्ध जैसी परिस्थितियों के चलते कुछ परीक्षाएं रद्द कर दी गई थीं, जिसके लिए CBSE ने विशेष Assessment Scheme जारी की थी। इसके बावजूद उसका परिणाम घोषित नहीं किया गया।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति Manmohan और न्यायमूर्ति Vijay Bishnoi की अवकाशकालीन पीठ ने CBSE और उसके क्षेत्रीय कार्यालय को नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।

CBSE की ओर से अदालत को बताया गया कि छात्र निजी (Private Candidate) के रूप में परीक्षा में शामिल हुआ था और उसके मूल्यांकन के लिए स्कूल आधारित आकलन उपलब्ध नहीं है। इस पर न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा कि छात्र के पूर्व रिकॉर्ड को आधार बनाया जा सकता है और बोर्ड को जल्द निर्णय लेना चाहिए।

जब CBSE के वकील ने अतिरिक्त समय की मांग करते हुए कहा कि बोर्ड पहले से काफी कार्यभार में है, तब अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “यह एक बच्चे के करियर का मामला है। उसके एडमिशन छूट सकते हैं। जरूरत पड़े तो रातभर काम कीजिए।”

याचिका के अनुसार, प्रांशु पटेल ने 2026 में सऊदी अरब के अल जुबैल स्थित स्कूल से निजी उम्मीदवार के रूप में Improvement Exam दिया था। उसने फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स, इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस विषयों में सुधार परीक्षा के लिए आवेदन किया था। हालांकि क्षेत्र में तनावपूर्ण हालात के कारण केवल फिजिक्स और केमिस्ट्री की परीक्षा हो सकी, जबकि मैथ्स, इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस की परीक्षाएं रद्द कर दी गईं।

इसके बाद CBSE ने 27 मार्च 2026 को पश्चिम एशियाई देशों के छात्रों के लिए विशेष Assessment Scheme जारी की थी। इस योजना के तहत स्कूल रिकॉर्ड, क्वार्टरली परीक्षा, हाफ ईयरली परीक्षा और प्री-बोर्ड के अंकों के आधार पर परिणाम तैयार करने का प्रावधान किया गया था।

छात्र का दावा है कि उसके स्कूल के पास सभी आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध हैं और उसी आधार पर उसका परिणाम जारी किया जा सकता है। लेकिन अब तक रिजल्ट घोषित नहीं होने से उसकी उच्च शिक्षा की योजनाएं प्रभावित हुई हैं। उसने B.Tech (Computer Science and AI) कोर्स में प्रवेश के लिए आवेदन किया था, जहां समय पर परिणाम उपलब्ध न होने के कारण प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

याचिका में कहा गया है कि CBSE की ओर से परिणाम घोषित न करना मनमाना, भेदभावपूर्ण और संविधान के अनुच्छेद 14 तथा 21 का उल्लंघन है। छात्र ने अदालत से मांग की है कि बोर्ड को विशेष Assessment Scheme लागू कर परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया जाए। वैकल्पिक रूप से प्रभावित विषयों की विशेष परीक्षा आयोजित करने का आदेश भी देने की मांग की गई है।

अब इस मामले में सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और CBSE के जवाब पर टिकी हुई हैं, क्योंकि फैसला सीधे छात्र के शैक्षणिक भविष्य को प्रभावित कर सकता है।