What's brewing in Mumbai's BMC? Shinde's hotel politics has heightened the suspense.
Mumbai BMC Election 2026 में महायुति (Mahayuti Alliance) की जीत के बाद यह माना जा रहा था कि जल्द ही Mumbai Mayor के नाम का ऐलान हो जाएगा। लेकिन इसी बीच डिप्टी सीएम Eknath Shinde के एक फैसले ने मुंबई की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। शिंदे ने अपने सभी 29 elected corporators को एक होटल में ठहराया है, जिसे लेकर सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एकनाथ शिंदे ने भाजपा के सामने Mumbai Mayor rotation formula (2.5 years each) का प्रस्ताव रखा है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। अब इस पर Chief Minister Devendra Fadnavis का बयान सामने आया है।
CM Devendra Fadnavis का बयान: “सब कुछ आपसी सहमति से होगा”
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिंदे की होटल मीटिंग को लेकर उठ रहे सवालों पर सफाई देते हुए कहा—
“जैसे मैं पुणे में अपने नवनिर्वाचित पार्षदों के साथ बैठक कर रहा हूं, वैसे ही एकनाथ शिंदे मुंबई में बैठक कर रहे हैं। इसमें corporator horse trading जैसी कोई बात नहीं है।”
उन्होंने कहा कि जल्द ही वे खुद, एकनाथ शिंदे और दोनों दलों के वरिष्ठ नेता बैठक करेंगे और BMC Mayor decision पर सहमति बनाई जाएगी।
CM ने यह भी स्पष्ट किया कि महायुति में no internal conflict है और गठबंधन पूरी मजबूती से मुंबई के विकास के लिए काम करेगा।
BMC Numbers Game: मामूली फेरबदल भी बिगाड़ सकता है समीकरण
BMC Election Result में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है—
BJP: 89 seats
Shiv Sena (Shinde faction): 29 seats
कुल: 118 seats
जबकि BMC में बहुमत का आंकड़ा बेहद नजदीक है। ऐसे में यह thin majority किसी भी छोटे राजनीतिक बदलाव से खतरे में पड़ सकती है। यही वजह है कि मेयर पद को लेकर हर कदम बेहद रणनीतिक माना जा रहा है।
Shivsena UBT का बयान: “भगवान चाहेंगे तो मेयर हमारा”
महायुति की खींचतान के बीच Shiv Sena UBT ने भी राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। पार्टी प्रमुख Uddhav Thackeray ने कहा कि—
“मुंबई का मेयर शिवसेना यूबीटी का बने, यह मेरा सपना है। अगर भगवान की कृपा हुई, तो यह सपना अब भी पूरा हो सकता है।”
हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह कैसे संभव होगा।
Opposition का दावा: BJP की जीत शिवसेना के बंटवारे का नतीजा
Shiv Sena UBT नेता Sunil Prabhu ने दावा किया कि—
“अगर शिवसेना एकजुट होती, तो BJP के लिए BMC जीतना संभव नहीं होता।”
वहीं कांग्रेस के पूर्व नेता Sanjay Jha ने भी यही तर्क दोहराया कि विपक्ष की कमजोरी ने भाजपा को फायदा पहुंचाया।