US-China Tension: Will America use Pakistan against China for Rare Earth Elements?
Singapore के Shangri-La Dialogue 2025 में दुनिया की निगाहें थीं Indo-Pacific Security Dynamics पर। लेकिन इस बार जो सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, वह था China के Defence Minister Dong Jun की अनुपस्थिति। चीन की ओर से किसी शीर्ष नेता का न आना यह साफ संकेत दे रहा है कि बीजिंग और वॉशिंगटन के बीच तनाव अब एक नए स्तर पर पहुंच चुका है।
चीन की गैरमौजूदगी और अमेरिका का सख्त संदेश
Shangri-La Dialogue, जो कि एशिया का सबसे अहम defence diplomacy platform माना जाता है, वहां US Defense Secretary Pete Hegseth ने सीधे तौर पर Beijing को टारगेट करते हुए कहा कि चीन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में military balance को बदलने की कोशिश कर रहा है।
Hegseth ने ताइवान के चारों ओर हो रहे चीनी सैन्य अभ्यास और South China Sea skirmishes का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया कि चीन अपने पड़ोसियों के लिए एक security threat बनता जा रहा है।
Asia को बढ़ाने होंगे Defence Budgets: अमेरिका का सीधा संदेश
Hegseth ने साफ कहा कि “China threat is real and imminent” यानी चीन से खतरा वास्तविक है और कभी भी हकीकत बन सकता है। इस खतरे के मद्देनजर उन्होंने एशियाई देशों से आग्रह किया कि वे अपने defense budgets में इज़ाफा करें।
उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका Indo-Pacific में न केवल वापस आया है, बल्कि यहीं पर टिके रहने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह बयान सीधे तौर पर चीन को geopolitical pressure देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
Rare Earth Elements और Tech Race में चीन पर अमेरिका की निर्भरता
विशेषज्ञों की मानें तो अमेरिका इस वक्त rare earth elements supply को लेकर चीन पर काफी हद तक निर्भर है। इन एलिमेंट्स की कमी अमेरिका के defense production, semiconductor manufacturing, और green technologies को नुकसान पहुंचा सकती है। यही वजह है कि अमेरिका अब चीन पर दबाव बनाने के लिए Indo-Pacific strategy को और आक्रामक बना रहा है।
पाकिस्तान को बनाया जा रहा है रणनीतिक pawn?
इन सबके बीच पाकिस्तान की भूमिका भी तेजी से चर्चा में आ रही है। हाल के हफ्तों में US-Pakistan silent diplomacy और military-level engagements में इज़ाफा देखा गया है। यह सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका, चीन के खिलाफ रणनीतिक रूप से पाकिस्तान को अपने पक्ष में करना चाहता है?
भारत नहीं देगा झुकाव, पाकिस्तान तैयार बैठा है?
भारत की strategic autonomy को देखते हुए अमेरिका जानता है कि वह भारत पर दबाव नहीं बना सकता। वहीं दूसरी ओर, economically crippled Pakistan, हमेशा से geopolitical chessboard पर opportunistic मोहरे की तरह रहा है।
Cold War के समय अफगानिस्तान में तालिबान को खड़ा करना हो या फिर 9/11 के बाद अमेरिका के साथ मिलकर उसी तालिबान के खिलाफ युद्ध लड़ना — पाकिस्तान का इतिहास बताता है कि वह money over loyalty की नीति पर चलता है।
अमेरिका-पाकिस्तान की नजदीकी: चीन को होना चाहिए सतर्क
अगर चीन और अमेरिका में भविष्य में कोई strategic conflict बढ़ता है, तो अमेरिका पाकिस्तान को एक बार फिर अपने पक्ष में खींच सकता है। पाकिस्तान सीधे तौर पर चीन के खिलाफ भले ही न जाए, लेकिन covert intelligence support या diplomatic balancing में अमेरिका की मदद कर सकता है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चीन पाकिस्तान को लेकर कितनी रणनीतिक समझदारी दिखाता है – क्या वह पाकिस्तान की dual loyalty को पहचानता है, या फिर पुरानी दोस्ती के भरोसे उसे अपनी Indo-Pacific chessboard में शामिल रखता है?