'Shiv Sena ek hi hai': Raj made Uddhav Thackeray emotional on his birthday
महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय बाद एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जब ठाकरे परिवार के दो ध्रुव — Uddhav Thackeray और Raj Thackeray — एक मंच पर दिखाई दिए। Marathi Language Issue को केंद्र में रखते हुए हुई यह जुगलबंदी ना सिर्फ एकनाथ शिंदे के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है, बल्कि BJP-Fadnavis leadership पर भी दबाव बढ़ा सकती है।
ठाकरे परिवार की ‘एकता’ और Shinde की चिंता
एक समय था जब Balasaheb Thackeray के नेतृत्व वाली शिवसेना महाराष्ट्र की राजनीति की धुरी मानी जाती थी। लेकिन आज Shiv Sena तीन हिस्सों में बंट चुकी है — एकनाथ शिंदे के पास असली शिवसेना और चुनाव चिन्ह, उद्धव ठाकरे के पास पार्टी का नाम और विरासत, जबकि राज ठाकरे की MNS अब भी अपनी जगह खोज रही है।
ऐसे में Uddhav और Raj Thackeray की हालिया एकता शिंदे के लिए Political Threat बन सकती है। खासकर तब, जब BMC elections 2025 नजदीक हैं, और मराठी अस्मिता की राजनीति फिर गर्मा रही है।
BJP-Fadnavis के लिए भी बढ़ा Pressure
राज ठाकरे का Aggressive Hindutva image और उद्धव ठाकरे की moderate regional appeal अगर एक साथ आती है, तो Congress-NCP के लिए भी परेशानी खड़ी हो सकती है। वहीं, BJP को भी अपने सबसे भरोसेमंद सहयोगी — एकनाथ शिंदे — की संभावित कमजोर स्थिति से जूझना पड़ सकता है।
Devendra Fadnavis, जो अभी Maharashtra के सत्ता समीकरण को संभाले हुए हैं, उन्हें अब ठाकरे परिवार की यह नई समीकरण सीधी चुनौती दे सकती है।
उद्धव का सीधा हमला: “जय गुजरात क्यों?”
Marathi identity पर बात करते हुए Uddhav ठाकरे ने उपमुख्यमंत्री शिंदे पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार के कार्यक्रम में शिंदे ने “जय गुजरात” का नारा लगाया, तो यह मराठी गौरव के खिलाफ था। उद्धव ने इसे “हताशा और आत्मसमर्पण” की निशानी बताया।
क्या मराठी मुद्दा बना सकता है गेमचेंजर?
फिलहाल, ठाकरे बंधु Marathi language और regional pride के मुद्दे पर एक मंच पर हैं। लेकिन यह मुद्दा आने वाले समय में Hindutva narrative में तब्दील हो सकता है — जो Congress और विपक्ष के लिए ideological contradiction बन जाएगा।
BMC चुनाव इसकी पहली परीक्षा होगी, जहां Shiv Sena (Shinde), BJP, NCP (Ajit Pawar) के मुकाबले एक Thackeray+Thackeray alliance विपक्ष में खड़ा हो सकता है।
त्रिभाषा नीति पर भी घमासान
सरकार द्वारा लागू की गई Tri-Language Policy के विरोध में मराठी संगठनों ने आवाज उठाई थी। अब जब सरकार ने यह नीति वापस ली है, तो उद्धव ने इसे “हमारी एकता की जीत” बताया। उन्होंने कहा कि “हम जब साथ होते हैं, तभी मजबूत होते हैं। लेकिन फिर आपस में बंट जाते हैं, यही हमारी कमजोरी है।”