रामनगर की रामलीला में 52वें वर्ष में शूर्पणखा का नासिका छेदन, डिप्टी रेंजर इंदरलाल की अद्भुत कहानी

उत्तराखंड में दशहरा का उत्साह इस समय चरम पर है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में Ramnagar Ramlila का आयोजन जोरों पर है, और भवानीगंज की रामलीला इस बार अपने 52वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। इस सांस्कृतिक महापर्व के सातवें दिन मंच पर शूर्पणखा नासिका छेदन का प्रसंग देखने के लिए भारी जनसैलाब उमड़ा।

राम, लक्ष्मण, रावण और शूर्पणखा के पात्रों ने दर्शकों को अपनी अदाकारी से मंत्रमुग्ध कर दिया। लेकिन इस वर्ष की रामलीला की सबसे अनोखी बात रही शूर्पणखा के पात्र को निभा रहे डिप्टी रेंजर इंदरलाल की कहानी, जिसने अपनी अभिनय कला का इस्तेमाल करते हुए एक फरार पोचर को पकड़ने में वन्यजीव संरक्षण में बड़ा योगदान दिया।

25 साल से शूर्पणखा का रोल निभा रहे हैं डिप्टी रेंजर

Inderlal, जो पिछले 40 सालों से रामलीला में अभिनय कर रहे हैं, 25 साल से शूर्पणखा के पात्र में दिखाई दे रहे हैं। इंदरलाल बताते हैं कि शूर्पणखा का रोल करना आसान नहीं है। इसमें महिला की आवाज निकालनी पड़ती है, जो उन्होंने दशकों की अभ्यास से निखारी है।

“मैंने रामलीला मंचन की कला का इस्तेमाल करते हुए 10 साल पहले फरार पोचर को पकड़ने में वन विभाग की मदद की। मैंने लड़की की आवाज में कॉल किया और जैसे ही वह मिलने आया, हमारी टीम ने उसे दबोच लिया।”
– इंदरलाल, शूर्पणखा के रोल में

इस घटना ने न केवल वन्यजीव संरक्षण में मिसाल कायम की, बल्कि इंदरलाल को वन विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा सम्मानित भी किया गया।

रामलीला का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व

भवानीगंज रामलीला समिति के सचिव Rajeev Agrawal बताते हैं:

“हमारी समिति पिछले 52 वर्षों से रामलीला का आयोजन कर रही है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में नैतिकता और संस्कृति को जागरूक करने का माध्यम भी है। हल्द्वानी, कालाढूंगी, पिरूमदारा, काशीपुर और ढिकुली सहित आसपास के क्षेत्र से लोग इसे देखने आते हैं।”

रामलीला के इस वर्ष के सातवें दिन का मंचन दर्शकों को रामायण के गूढ़ संदेश से अवगत कराने के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण के महत्व को भी उजागर करता है।

लक्ष्मण के पात्र ने भी संदेश दिया

रामलीला में लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे मयंक रावत ने कहा:

“आज की युवा पीढ़ी धीरे-धीरे अपनी संस्कृति से कटती जा रही है। ऐसे आयोजन ही हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने में मदद करते हैं। रामलीला केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि संस्कृति को पीढ़ी दर पीढ़ी पहुँचाने का सबसे प्रभावी तरीका है।”

मंचन में लक्ष्मण-शूर्पणखा प्रसंग के दौरान रावण की बहन पंचवटी में श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के साथ दुर्व्यवहार करती है, और लक्ष्मण उसका जवाब नाक काटकर देते हैं। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ सदाचार और वन्यजीव सुरक्षा का संदेश भी दिया।

रामनगर की रामलीला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक जागरूकता का प्रतीक है। डिप्टी रेंजर इंदरलाल जैसे पात्रों की बहुआयामी भूमिका यह साबित करती है कि कला और सेवा का संगम समाज और प्रकृति के लिए नई मिसाल कायम कर सकता है।