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Serious allegations against CJI Sanjiv Khanna, BJP said – 'Statement is personal'
भारतीय जनता पार्टी ने अपने ही सांसद Nishikant Dubey के Chief Justice of India (CJI) Sanjiv Khanna पर दिए विवादास्पद बयान से पल्ला झाड़ लिया है। शनिवार देर रात BJP अध्यक्ष JP Nadda ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (formerly Twitter) पर स्पष्ट किया कि पार्टी का इस तरह के बयानों से कोई संबंध नहीं है।
जेपी नड्डा ने लिखा, “भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा द्वारा न्यायपालिका व देश के मुख्य न्यायाधीश पर दिए गए बयान पूरी तरह उनके निजी विचार हैं। भारतीय जनता पार्टी का इनसे कोई लेना-देना नहीं है और पार्टी ऐसे किसी भी बयान का समर्थन नहीं करती।”
क्या कहा था Nishikant Dubey ने?
झारखंड के गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट को लेकर तीखा हमला किया था। उन्होंने कहा कि, “अगर हर मुद्दे पर Supreme Court को ही फैसला करना है तो फिर संसद और विधानसभा को बंद कर देना चाहिए।”
इतना ही नहीं, दुबे ने यह तक कह दिया कि, “देश में जितने भी गृह युद्ध जैसी स्थितियां बन रही हैं, उसके लिए CJI Sanjiv Khanna जिम्मेदार हैं।” उन्होंने यह आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट विधायिका द्वारा बनाए गए कानूनों को रद्द कर रहा है और अपनी सीमा से बाहर जाकर काम कर रहा है।
Supreme Court की Powers पर उठाए सवाल
निशिकांत दुबे ने PTI से बातचीत में कहा कि संविधान के Article 368 के तहत कानून बनाने का अधिकार संसद को है। उन्होंने कहा कि Supreme Court का काम कानून की व्याख्या करना है, न कि उन्हें रद्द करना। दुबे का आरोप था कि अदालत अब राष्ट्रपति को भी निर्देश दे रही है, जो न्यायिक मर्यादाओं का उल्लंघन है।
Waqf Act Amendment पर कोर्ट की टिप्पणी से उपजा विवाद
दुबे का यह बयान उस समय आया जब Supreme Court ने Waqf Amendment Act के कुछ प्रावधानों पर सवाल खड़े किए। केंद्र सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया कि वह अगली सुनवाई तक इन प्रावधानों को लागू नहीं करेगी। इसी संदर्भ में दुबे ने अदालत की भूमिका पर सवाल उठाए और कहा कि “राम मंदिर मामले में कोर्ट ने डाक्यूमेंट्स मांगे थे, लेकिन वक्फ केस में इसे नजरअंदाज किया जा रहा है।”
BJP का Damage Control: न्यायपालिका का सम्मान जरूरी
जेपी नड्डा ने पार्टी की ओर से Damage Control करते हुए कहा कि भाजपा सदैव न्यायपालिका का सम्मान करती आई है। सुप्रीम कोर्ट समेत सभी अदालतें लोकतंत्र की रीढ़ हैं और संविधान की रक्षा करने वाला सबसे मजबूत स्तंभ हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने सभी नेताओं को ऐसे बयानों से बचने की हिदायत दी है।