Aravalli Hills पर SC Stay: क्या अब रुक पाएगा Mining और Environmental Damage?

अरावली पर्वतमाला से जुड़े अहम मामले में Supreme Court ने अपने ही 20 नवंबर के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अब इस केस की अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 को होगी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों ने स्वागत किया है और इसे Aravalli Protection की दिशा में अहम कदम बताया है।

Experts का कहना है कि अरावली को केवल परिभाषित (Define) करने की बजाय इसे पूरी तरह Protected Natural Heritage घोषित किया जाना चाहिए। गुरुग्राम और फरीदाबाद के कंक्रीट जंगलों के बीच रहने वाले करोड़ों लोगों के लिए अरावली ही वह प्राकृतिक ढाल है, जो भविष्य में Delhi-NCR Air Pollution से राहत दिला सकती है।

Mining पर Complete Ban की मांग

पर्यावरणविद् नीलम आलूवालिया ने कहा कि अरावली पर चल रही जांच केवल सरकार और अदालतों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि जब तक विस्तृत अध्ययन पूरा नहीं हो जाता, तब तक Haryana, Rajasthan और Gujarat में Legal और Illegal Mining—दोनों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।

क्या कह रहे हैं Environmental Experts?

पर्यावरणविद् सुनील हरसाना के अनुसार, अरावली केवल पत्थर और मिट्टी का ढेर नहीं, बल्कि यह Delhi-NCR के लिए Natural Air Filter की तरह काम करती है।
वहीं, वैशाली राणा ने कहा कि ये पहाड़ हमारे पूर्वजों की धरोहर हैं और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रखते हैं।

Save Aravalli Trust के राजू रावत का मानना है कि केवल ऊंचाई के आधार पर अरावली को सीमित करना scientific और ecological दृष्टि से गलत है।
पर्यावरणविद् जगदीश चौधरी ने अरावली को National Heritage घोषित करने और इसमें मानव हस्तक्षेप पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की।

पहाड़ियों के टूटने से बढ़ेगा खतरा

Experts के मुताबिक, अरावली Natural Water Recharge Zone का सबसे बड़ा स्रोत है। इसकी चट्टानें बारिश के पानी को सोखकर Groundwater Level बनाए रखती हैं। यदि पहाड़ियों का क्षरण और Mining जारी रही, तो Leopard और अन्य वन्य जीवों के आबादी वाले इलाकों में आने का खतरा और बढ़ सकता है।

Judicial Intervention को बताया जरूरी

पर्यावरणविद् भावरीन कंधारी ने कहा कि अरावली में जिस स्तर पर खनन हो रहा है, वह प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। ऐसे में Judicial Intervention बेहद जरूरी था। Supreme Court द्वारा आदेश पर अंतरिम रोक को उन्होंने Environment Protection के लिए Positive Step बताया।