Retiring Supreme Court Judge Justice Abhay Oka’s Emotional Final Day: मां को अंतिम विदाई देकर लौटे और सुनाए 11 फैसले
नई दिल्ली – न्यायपालिका के इतिहास में कभी-कभार ऐसे क्षण आते हैं, जो अपने पीछे सिर्फ फैसले ही नहीं, बल्कि कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल भी छोड़ जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट के तीसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस अभय श्रीनिवास ओका का शुक्रवार 24 मई का दिन ऐसा ही रहा। अपनी मां के निधन के कुछ घंटे बाद, वह दिल्ली लौटे और 11 महत्वपूर्ण मामलों में फैसला सुनाया। यह उनके कार्यकाल का अंतिम दिन भी था, क्योंकि वे 25 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
परंपरा से अलग हटकर निभाया दायित्व
SCOARA (Supreme Court Advocates on Record Association) द्वारा आयोजित विदाई समारोह में जस्टिस ओका ने कहा,
“मुझे ‘रिटायर’ शब्द से नफरत है। सुप्रीम कोर्ट की परंपरा है कि सेवानिवृत्ति वाले दिन न्यायाधीश कोई कार्य नहीं करते, लेकिन मैं इससे सहमत नहीं हूं। मैं अंतिम दिन भी पीठ में बैठूंगा और फैसले सुनाऊंगा।”
उन्होंने उस परंपरा को चुनौती देते हुए अपने अंतिम दिन न केवल कोर्ट में बैठे बल्कि गंभीर संवैधानिक मामलों में निर्णय भी दिए।
मां को अंतिम विदाई, फिर न्याय की अंतिम ड्यूटी
21 मई को सम्मान समारोह के बाद उन्हें अपनी मां वसंती ओका के निधन की सूचना मिली। 22 मई को ठाणे में उनका अंतिम संस्कार हुआ, जिसमें जस्टिस ओका उपस्थित रहे। लेकिन भावनाओं के इस क्षण में भी उन्होंने अपने न्यायिक धर्म को प्राथमिकता दी और दिल्ली लौटकर 24 मई को कोर्ट नंबर 3 में पीठ की अध्यक्षता की।
अंतिम दिन दिए गए अहम फैसले
उनके द्वारा सुनाए गए 11 फैसलों में एक स्वतः संज्ञान याचिका विशेष रूप से चर्चा में रही, जो किशोरों की गोपनीयता के अधिकार (Juvenile Privacy Rights) से जुड़ी थी। यह कोलकाता हाईकोर्ट की एक विवादास्पद टिप्पणी के खिलाफ स्वतः लिया गया मामला था।
संवैधानिक मूल्यों के प्रबल रक्षक
जस्टिस ओका को भारतीय संविधान और नागरिक स्वतंत्रता का निष्ठावान प्रहरी माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट में रहते हुए उन्होंने कई ऐतिहासिक निर्णय दिए:
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अनुच्छेद 370 की आलोचना पर व्हाट्सएप स्टेटस डालने वाले प्रोफेसर के खिलाफ FIR रद्द की।
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नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में लगे निषेधाज्ञा आदेश को असंवैधानिक करार दिया, जब वे कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे।
अदालती सफर: एक नजर
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2003 में बॉम्बे हाईकोर्ट में नियुक्ति
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2019-2021: कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
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अगस्त 2021: सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति
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सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण संवैधानिक बेंचों का हिस्सा रहे