Refugee या घुसपैठिए? Supreme Court के 4 सवाल बदल सकते हैं रोहिंग्या की किस्मत
भारत में रह रहे Rohingya मुसलमानों की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार से एक अहम सुनवाई शुरू हुई। इस सुनवाई में कोर्ट यह तय करेगा कि ये लोग Refugees हैं या Illegal Immigrants।
इस मुद्दे से जुड़ी सभी याचिकाओं को जोड़कर कोर्ट ने सुनवाई की शुरुआत की है, जिनमें दो प्रमुख बातें शामिल हैं:
-
रोहिंग्या को जबरन देश से निकालने के खिलाफ याचिकाएं
-
Rohingya Refugee Camps में basic amenities (जैसे पानी, sanitation और education) मुहैया कराने की मांग
Supreme Court के 4 Crucial Questions जो तय करेंगे Rohingya का Status
Justice सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस केस में 4 महत्वपूर्ण सवाल तय किए हैं:
-
क्या Rohingya को शरणार्थी (Refugee) माना जा सकता है?
अगर हां, तो उन्हें कौन-कौन से legal protections मिलेंगे? -
क्या वे अवैध प्रवासी (Illegal Immigrants) हैं?
और अगर हां, तो क्या भारत सरकार उन्हें कानून के तहत deport कर सकती है? -
अगर अवैध माने जाते हैं, तो क्या उन्हें indefinite detention में रखा जा सकता है?
या फिर क्या उन्हें कुछ शर्तों पर ज़मानत का अधिकार मिलना चाहिए? -
क्या रोहिंग्या शिविरों में रहने वाले लोगों को basic facilities जैसे जल, sanitation और शिक्षा दी जा रही है?
केंद्र और Petitioners की दलीलें: कौन क्या कह रहा है?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्या से जुड़े सभी मामलों को एक बैच में क्लब कर दिया है, जबकि अन्य foreign nationals से जुड़े मामलों को अलग किया गया।
-
Advocate Kanu Agarwal (for Government of India) ने कोर्ट से कहा कि पहले Rohingya मामलों का निपटारा किया जाए, फिर बाकी विदेशी नागरिकों पर फैसला हो।
-
Senior Advocate Prashant Bhushan ने कहा कि भले ही भारत United Nations Refugee Convention का हिस्सा नहीं है, लेकिन Rohingya को UN standards के मुताबिक minimum human rights मिलने चाहिए।
-
Advocates Ashwini Kumar और Colin Gonsalves ने बताया कि म्यांमार में चल रहे अत्याचार से जान बचाकर रोहिंग्या भारत आए हैं, लेकिन अब म्यांमार उन्हें वापस लेने को तैयार नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट का पुराना निर्णय और सरकार की दलील
केंद्र सरकार ने 2021 के एक पुराने फैसले का हवाला दिया जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि:
-
केंद्र सरकार के पास Rohingya को deport करने का अधिकार है।
-
लेकिन साथ ही, हर व्यक्ति को Article 21 के तहत Right to Life and Personal Liberty प्राप्त है।
-
हालांकि, Right to reside in India केवल भारतीय नागरिकों को ही है।
India का Refugee Policy Framework: कानून नहीं, परंपरा ज़रूर
भारत ने अब तक न तो 1951 United Nations Refugee Convention और न ही उसके 1967 Protocol पर दस्तखत किए हैं।
इस वजह से भारत में शरणार्थियों के लिए कोई dedicated refugee law मौजूद नहीं है।
लेकिन ऐतिहासिक तौर पर भारत ने:
-
Tibetan refugees
-
Sri Lankan Tamils
-
और अन्य persecuted groups को humanitarian grounds पर asylum दिया है।