Parking Problem in Nainital: HC ने मांगा Long-Term Solution, IIM और IIT को मिलाया साथ

पर्यटन सीजन में Nainital Traffic Congestion और Parking Crisis एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। इसी मुद्दे पर गुरुवार को Uttarakhand High Court में एक लंबी सुनवाई हुई। Chief Justice G.R. Narender और Justice Alok Mahara की खंडपीठ ने इस मामले से जुड़ी आधा दर्जन याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की।

अदालत ने IIM Kashipur के विशेषज्ञों से कहा है कि वे सोमवार तक यह बताएं कि नैनीताल की ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था में सुधार लाने के लिए उन्हें किन अतिरिक्त तकनीकी एजेंसियों की सहायता चाहिए।

 ट्रैफिक लोड और रूट डाइवर्जन पर मांगी रिपोर्ट

IIM Kashipur के डायरेक्टर अपनी टीम के साथ अदालत के समक्ष वर्चुअली उपस्थित हुए। टीम ने नैनीताल, कैंचीधाम, भवाली, भीमताल, काठगोदाम और कालाढूंगी जैसे टूरिस्ट हॉटस्पॉट्स का दौरा किया और पार्किंग, रूट डायवर्जन और शटल सेवा को लेकर अपने प्राथमिक सुझाव साझा किए।

High Court ने निर्देश दिया कि IIM काशीपुर, IIT Roorkee, Indian Road Congress, CRRI (Central Road Research Institute) और Geological Survey of India जैसी एजेंसियों के साथ मिलकर नैनीताल की road load capacity, sustainable parking options और smart traffic control systems पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें।

 पार्किंग और शटल सेवा के लिए एचएमटी भूमि का उपयोग

अदालत ने उत्तराखंड सरकार से पूछा है कि क्यों न रानीबाग स्थित HMT की 45 एकड़ जमीन पर बड़ी पार्किंग बनाई जाए और वहां से पर्यटकों के लिए eco-friendly shuttle service चलाई जाए। इससे नैनीताल शहर में वाहनों का दबाव कम हो सकता है।

 हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी जताई चिंता

सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में नैनीताल के कमजोर health infrastructure का मुद्दा भी लाया गया। सरकार की योजना भवाली में 45 एकड़ भूमि पर Super Specialty Hospital बनाने की थी, जो अब तक अमल में नहीं लाई गई। कोर्ट इस विषय पर भी सोमवार को अलग से सुनवाई करेगा।

 CCTV Surveillance और मल्टीलेवल पार्किंग पर भी चर्चा

कोर्ट ने सभी पार्किंग स्थानों पर CCTV Cameras लगाने और निगरानी को सख्त करने के निर्देश दिए। साथ ही, Ashok Talkies की जमीन पर ₹5.25 करोड़ की लागत से बन रही 90 वाहनों की multi-level parking को लेकर भी सवाल उठे। नगर पालिका के वकील ने इसे public fund misuse बताया, जिस पर अदालत ने फिलहाल निर्माण रोकने के निर्देश दिए हैं।

 अगली सुनवाई 20 अप्रैल को

अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी, जहां IIM Kashipur और अन्य तकनीकी एजेंसियों की ओर से पेश की गई प्रारंभिक रिपोर्टों की समीक्षा की जाएगी।