Only 28 Yadav MLAs remain; backward and women's votes have changed the political map of Bihar.
बिहार चुनाव 2025 में NDA ने इस बार ‘MY’ रणनीति (महिला और युवा) के ज़रिए माय (मुस्लिम और यादव) समीकरण को मात दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि बिहार ने इस बार MY की नई व्याख्या की है। चुनाव परिणामों से साफ हुआ कि महिलाओं और युवाओं ने NDA के पक्ष में निर्णायक मतदान किया।
विधायकों के जातीय समीकरण में बड़ा बदलाव
18वीं विधानसभा में चुनकर आए लगभग आधे विधायक पिछड़ा और अतिपिछड़ा समुदाय से हैं। कुल 243 विधायकों में 83 पिछड़ा वर्ग और 37 अतिपिछड़ा वर्ग के विधायक शामिल हैं। सवर्ण समाज के 72 विधायक हैं। आरक्षित सीटों से 40 दलित और आदिवासी विधायक सदन पहुंचे हैं। अल्पसंख्यक समुदाय से मात्र 11 विधायक चुने गए हैं, जिनमें एआईएमआईएम के पांच हैं। यादव समुदाय के विधायक अब केवल 28 रह गए हैं।
पार्टीवार जातीय आंकड़े
लोजपा (रामविलास): 19 में सात सवर्ण, पांच अनुसूचित जाति और सात पिछड़ी जाति के विधायक।
हम (सेकुलर): 5 में चार दलित और एक भूमिहार।
रालोमो: 4 में दो सवर्ण और दो कुशवाहा।
राजद: 25 में 11 यादव, 3 मुस्लिम, 2 सवर्ण (भूमिहार), 2 कुर्मी-कुशवाहा और 4 EBC, 3 अनुसूचित जाति।
कांग्रेस: 6 में दो मुस्लिम, दो अतिपिछड़ा, एक दलित और एक कुशवाहा।
आईआईपी: इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता तांती-तत्वा समाज (EBC) से।
भाकपा माले: 2 में एक यादव और एक कुशवाहा।
माकपा: 1 कुशवाहा।
एआईएमआईएम: 5 अल्पसंख्यक।
बसपा: 1 यादव।
इस चुनाव ने साफ दिखाया कि महिला और युवा वोट ने बिहार की राजनीतिक दिशा तय की। NDA की MY रणनीति ने माय समीकरण को मात दी और यादवों की संख्या में कमी आई, जबकि पिछड़ा और अतिपिछड़ा समुदाय और सवर्ण वोटर की हिस्सेदारी बढ़ी।