Married Daughter Not Dependent’ – सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जानिए मुआवजे में किसे मिला अधिकार
Supreme Court Ruling on Motor Vehicle Act: सुप्रीम कोर्ट ने Motor Vehicle Act के तहत मुआवजे से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट कर दिया है कि विवाहित बेटी को “आश्रित मुआवजे” का अधिकार तब तक नहीं मिलेगा, जब तक वह यह साबित नहीं कर देती कि वह मृतक पर आर्थिक रूप से निर्भर थी।
यह फैसला जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने 13 मई को सुनाया। मामला 2008 में एक सड़क दुर्घटना में मारी गई महिला पारस शर्मा से जुड़ा है, जिनकी विवाहित बेटी और 70 वर्षीय मां ने मुआवजा दावा दायर किया था।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि—
“विवाहित बेटी को आमतौर पर ससुराल में आर्थिक रूप से आश्रित माना जाता है, जब तक कि वह इसका उल्टा प्रमाणित न कर दे। केवल कानूनी वारिस होने से आश्रित मुआवजा पाने का हक नहीं बनता।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि विवाहित बेटी को Section 140 (no-fault liability) के अंतर्गत मुआवजा मिल सकता है, लेकिन आश्रित मुआवजा (dependent compensation) तभी मिलेगा जब आर्थिक निर्भरता साबित हो।
मां को मिला पूरा हक, बेटी को क्यों नहीं?
इस केस में राजस्थान हाईकोर्ट ने पहले बेटी का मुआवजा घटाकर ₹50,000 कर दिया था और मां के दावे को खारिज कर दिया था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मां के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि—
“जब बेटी की मौत हुई, तब मां 70 वर्ष की थीं, उनके पास कोई आय नहीं थी और वे पूरी तरह बेटी पर निर्भर थीं।”
इसके आधार पर कोर्ट ने मां को ₹19,22,356 का मुआवजा देने का आदेश दिया।
कानून की व्याख्या: Section 166, 168 और 140
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Section 166 और 168: इन धाराओं के तहत मृतक और दावाकर्ता के बीच आर्थिक संबंध जरूरी होते हैं।
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Section 140: इसमें आश्रित न होने पर भी एक निश्चित राशि का मुआवजा दिया जा सकता है।