‘पंडित’ विवाद के बाद बड़ा फैसला, भर्ती परीक्षाओं में अब नहीं होंगे ऐसे सवाल

UP Police Bharti Exam में ‘पंडित’ शब्द को लेकर शुरू हुआ विवाद अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। मामले में बढ़ती राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाओं के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने प्रदेश के सभी भर्ती बोर्डों और आयोगों के अध्यक्षों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी government recruitment exam में ऐसा कोई प्रश्न नहीं होना चाहिए जिससे किसी जाति, धर्म या समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचे।

किसी की आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने सभी भर्ती बोर्डों के चेयरपर्सन्स को निर्देश दिया है कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय language sensitivity और social respect का विशेष ध्यान रखा जाए।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार समानता और सम्मान (equality and dignity) के सिद्धांत पर काम करती है, इसलिए प्रश्नपत्रों में इस्तेमाल होने वाली शब्दावली बेहद सावधानी से चुनी जानी चाहिए।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति, जाति, पंथ या समुदाय के सम्मान से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

पेपर सेटर्स और एजेंसियों पर सख्त नियम

मुख्यमंत्री ने केवल भर्ती बोर्डों को ही नहीं, बल्कि paper setters और external exam agencies के लिए भी सख्त नियम बनाने का निर्देश दिया है।

नई व्यवस्था के तहत

विवादित शब्दों के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध

प्रश्नपत्रों की multi-level screening

पेपर तैयार करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

सरकार का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं में transparency और fairness को और मजबूत करना है।

MoU में जोड़ी जाएगी नई शर्त

अब प्रश्नपत्र तैयार करने वाली एजेंसियों के साथ होने वाले MoU (Memorandum of Understanding) में नई शर्त जोड़ी जाएगी।

इस शर्त के अनुसार कोई भी एजेंसी ऐसा प्रश्न नहीं बनाएगी जिससे किसी की धार्मिक या सामाजिक भावनाएं आहत हों। नियमों का उल्लंघन होने पर

भारी जुर्माना

कानूनी कार्रवाई

एजेंसी को blacklist

जैसी कार्रवाई की जाएगी।

साथ ही सरकार ने ऐसे habitual offenders की पहचान कर उन्हें भर्ती प्रक्रिया से स्थायी रूप से बाहर करने के निर्देश दिए हैं।

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार की छवि transparent governance और fair recruitment system की है। किसी भी अधिकारी या एजेंसी की लापरवाही से इसे नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

इसलिए भर्ती बोर्डों को प्रश्नपत्रों की screening process को और मजबूत करने और छात्रों के बीच भरोसा बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

कैसे शुरू हुआ ‘पंडित’ विवाद

दरअसल शनिवार को हुई UP Police Sub Inspector (Daroga) Recruitment Exam के हिंदी प्रश्नपत्र में एक सवाल को लेकर विवाद शुरू हुआ।

बताया गया कि जिस प्रश्न का सही उत्तर ‘अवसरवादी’ होना चाहिए था, उसके विकल्पों में ‘पंडित’ भी शामिल कर दिया गया था।

इस पर विरोध के बाद उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Brajesh Pathak ने इसे गलत बताते हुए जांच और कार्रवाई की बात कही। इसके बाद कई भाजपा विधायकों ने मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप की मांग की।