London Protest: मुहम्मद यूनुस के खिलाफ लंदन में बांग्लादेशियों का गुस्सा क्यों फूटा?

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस की ब्रिटेन यात्रा भारी विरोध के साए में शुरू हुई। मंगलवार को जैसे ही यूनुस का विमान हीथ्रो एयरपोर्ट पर उतरा, सैकड़ों प्रदर्शनकारी पहले से ही काले झंडों और नारों के साथ तैयार थे। ‘Go Back Yunus’, ‘Murderer of Mukti Yoddhas’ और ‘Justice for Chinmoy Das’ जैसे नारों से लंदन की फिजा गूंज उठी।

यूनुस के काफिले पर फेंके गए अंडे और जूते

प्रदर्शनकारियों ने यूनुस के काफिले पर अंडे और जूते फेंके, जब वह होटल की ओर रवाना हो रहे थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यूनुस की सरकार अल्पसंख्यकों के दमन, हिंदू पुजारी चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी और बांग्लादेश में कट्टरपंथ को बढ़ावा देने की दोषी है। कई लोगों ने मांग की कि यूनुस को ब्रिटिश सरकार सरकारी मान्यता न दे

विरोध के मुख्य बिंदु

  • Unconstitutional interim government in Bangladesh

  • Persecution of minorities and religious figures

  • Support to extremism and diplomatic tilt towards Pakistan

  • Protest against UK PM Keir Starmer’s scheduled meeting

  • Demand for justice and democratic representation

पूरे ब्रिटेन में विरोध प्रदर्शन की तैयारी

इस विरोध की अगुवाई कर रहे Awami League समर्थक और बांग्लादेशी प्रवासी, जिनमें से कई यूनुस के सत्ता में आने के बाद देश छोड़ने पर मजबूर हुए।
प्रदर्शन का सिलसिला हीथ्रो से शुरू होकर चैथम हाउस, फिर ब्रिटिश संसद भवन तक पहुंच गया है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यूनुस के प्रवास के हर चरण पर वे विरोध दर्ज कराएंगे।

बांग्लादेश स्टूडेंट्स लीग का बड़ा बयान

बांग्लादेश स्टूडेंट्स लीग के अध्यक्ष सद्दाम हुसैन ने यूनुस सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि “यह प्रशासन 1971 के मुक्ति संग्राम के मूल्यों का अपमान है।”
उन्होंने यूनुस के पाकिस्तान के साथ बढ़ते रिश्तों को भी क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरनाक बताया।

क्या कहती है अंतरराष्ट्रीय बिरादरी?

यूनुस की इस यात्रा पर ब्रिटिश सरकार की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। प्रदर्शनकारी इस बात से भी नाराज़ हैं कि PM Keir Starmer की यूनुस से मुलाकात को एक अवैध और अपारदर्शी शासन को वैधता देना माना जा रहा है।
वे मांग कर रहे हैं कि ब्रिटेन जैसे लोकतांत्रिक देश को असंवैधानिक सरकारों से कोई आधिकारिक संवाद नहीं रखना चाहिए।