LOC Ceasefire: Silence on the border but fear remains in hearts, people in Mendhar-Poonch said- we want peace!
भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बाद LOC Ceasefire Agreement पर दोनों देश राज़ी हो गए हैं। जम्मू-कश्मीर के मेंढर, पुंछ, राजौरी, सांबा और उधमपुर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में बीते कई दिनों से हो रही गोलाबारी के बाद अब सीमा पर शांति लौटती नजर आ रही है।
लोग बोले- “हम घर छोड़कर कहीं नहीं जा सकते”
मेंढर के शाहनवाज खान ने कहा:
“हम इस सीजफायर का स्वागत करते हैं। हम सीमावर्ती लोग हैं, घर नहीं छोड़ सकते। बस यही उम्मीद है कि यह अमन कायम रहे।”
पाकिस्तान पर भरोसा नहीं: लोगों का डर बना हुआ
पुंछ के विशाल शर्मा ने कहा:
“Pakistan ने पहले भी 2003 और 2021 में सीजफायर तोड़ा है। हमें डर है कि ये फिर से ऐसा कर सकता है। हमारी सेना पूरी तरह सतर्क है।”
सेना और पुलिस का भरोसा
ADSP मोहन शर्मा ने मंगना, झल्लास और सलोत्री जैसे गांवों में जाकर लोगों को भरोसा दिलाया कि प्रशासन उनकी सुरक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार है।
बाजारों में लौट रही है रौनक, लेकिन घाव अभी ताजे हैं
कफील खान, एक स्थानीय व्यापारी ने बताया:
“गोलाबारी में कई दुकानें और मकान तबाह हो गए। अब बाजार खुल रहे हैं, लेकिन डर का साया अभी भी है।”
बाजार में पांच दिन बाद चहल-पहल शुरू हुई है। Trade Activities on LOC फिर से शुरू हो रही हैं।
बच्चों की पढ़ाई और Youth रोजगार से हुए वंचित
स्थानीय लोग बता रहे हैं कि LOC Firing Impact on Education बहुत गंभीर रहा। बच्चों की पढ़ाई बंद हो गई, युवाओं की नौकरियां और काम प्रभावित हुए।
“हमने 1947, 1965 और 1971 की जंग देखी है, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। अब अमन चाहिए, विकास चाहिए।”
‘Jung se kuch nahi milta’: युवाओं की शांति की अपील
युवा व्यापारी सोनू शर्मा ने कहा:
“जिनके परिवार के लोग मारे गए, उनके लिए जंग पहले ही हो चुकी है। अब सिर्फ अमन की जरूरत है।”
लोगों की मांग: सिर्फ Ceasefire नहीं, विकास भी चाहिए
लोगों का कहना है कि केवल सीजफायर काफी नहीं है। सरकार को सीमावर्ती इलाकों में Basic Infrastructure जैसे Schools, Hospitals, और Jobs Opportunities पर ध्यान देना चाहिए ताकि लोग सम्मानजनक जीवन जी सकें।