Kathua Cloudburst: सोते समय आई भीषण बाढ़, छतों पर जाकर बचाई गई जान, गृहस्थी बर्बाद

कठुआ में रविवार सुबह बादल फटने से अचानक आई बाढ़ ने लोगों की जिंदगी तहस-नहस कर दी। लोग अपने घरों में सो रहे थे, तभी तेज बहाव उनके घरों में घुस आया। घर के सदस्यों ने छतों पर चढ़कर अपनी जान बचाई, लेकिन घर की सारी गृहस्थी बर्बाद हो गई।

“पानी पांच फीट तक भर गया, कुछ बच नहीं पाया”

शहर के वार्ड-7 की निवासी ममता देवी ने बताया कि सुबह-सुबह पानी का तेज बहाव उनके घर में घुस गया। परिवार ने किसी तरह छत पर जाकर अपनी जान बचाई, लेकिन घर में रखा सारा सामान, बिस्तर और कपड़े बह गए। दो मंजिला घर वाले कुछ हद तक सुरक्षित रहे, जबकि भूतल वाले घरों में सब कुछ नष्ट हो गया।

वार्ड में तबाही और सड़कें बर्बाद

वार्ड में हर तरफ कीचड़ और मलबा बिखरा है। गलियों में टाइलें उखड़ गई हैं और कई घरों की चहारदीवारी ढह गई है। ब्राह्मण सभा के पास सड़क खड्ड जैसी हो गई है।

GMC कठुआ और पठानकोट-जम्मू हाईवे प्रभावित

राजकीय मेडिकल कॉलेज (GMC) कठुआ में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया। कॉलेज के साथ लगते जम्मू-पठानकोट हाईवे का 100 मीटर हिस्सा धंस गया। फिलहाल हाईवे पर चेतावनी संकेतक लगाए गए हैं और GMC प्रशासन ने सर्विस लेन से मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया है।

सेना और बचाव टीमें राहत कार्य में जुटीं

भारतीय सेना ने बचाव कार्य शुरू किया। रविवार को 150 जवान मौके पर पहुंचे और वायुसेना के हेलिकाप्टरों से घायलों को पठानकोट के मामून अस्पताल में पहुँचाया गया। सेना, पुलिस, SDRF और CRPF की टीमें राहत कार्य में मदद कर रही हैं। जवान बच्चों और बुजुर्गों को अपने कंधों और हाथों पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाते देखे गए।

दो जगहों पर बादल फटने से सात मौतें

किश्तवाड़ का दर्द अभी कम नहीं हुआ था कि कठुआ में दो जगह बादल फटने से भारी तबाही हुई। जुथाना के जोड़ में पांच जनजातीय लोगों की मौत हुई और पांच घायल हुए। जंगलोट के बागड़ा में मां और बेटी की मौत हुई, जबकि चार अन्य घायल हैं। मृतकों में पांच बच्चे भी शामिल हैं।

रेल यातायात भी प्रभावित हुआ और कई इलाकों में सड़क संपर्क कट गया। पठानकोट-जम्मू हाईवे पर सुबह 4 बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक यातायात बाधित रहा।