Justice Verma vs Judiciary: Was Natural Justice ignored in the investigation of the cash scam?
Delhi High Court के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ cash scandal मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इस मुद्दे पर संसद के आगामी Monsoon Session 2025 में Removal Motion पेश कर सकती है।
जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास से भारी मात्रा में जले हुए नोटों की बरामदगी के बाद से ही यह मामला संवैधानिक स्तर तक पहुंच गया था। अब सरकार सुप्रीम कोर्ट की in-house committee report के आधार पर उन्हें impeach करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
विपक्ष से मिल सकता है समर्थन
सूत्रों के अनुसार, कई विपक्षी सांसदों ने इस प्रस्ताव को लेकर संकेत दिया है कि वे इसे समर्थन दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो संसद में प्रस्ताव को जरूरी two-thirds majority मिलना संभव हो सकता है।
संविधान क्या कहता है?
भारत के संविधान का अनुच्छेद 124(4) स्पष्ट करता है कि सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के किसी भी जज को उनके खिलाफ दुर्व्यवहार (misconduct) या अक्षमता (incapacity) सिद्ध होने पर ही पद से हटाया जा सकता है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों – Lok Sabha और Rajya Sabha में दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है।
Lok Sabha में कम से कम 100 सांसदों का समर्थन जरूरी
Rajya Sabha में न्यूनतम 50 सांसदों का समर्थन चाहिए
सुप्रीम कोर्ट की जांच और रिपोर्ट
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए Chief Justice Sanjiv Khanna ने एक in-house probe panel गठित किया था, जिसमें पंजाब-हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज शामिल थे।
इस समिति ने 50 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए।
जांच पूरी होने के बाद, समिति ने जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की सिफारिश राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेज दी।
अब Modi Government उसी रिपोर्ट को आधार बनाकर संसद में प्रस्ताव लाने की तैयारी में है।
Removal की Process: स्टेप-बाय-स्टेप
Removal Motion संसद में पेश किया जाएगा
Lok Sabha Speaker या Rajya Sabha Chairman इसे स्वीकार कर सकते हैं
Judges Inquiry Act, 1968 के तहत एक 3-सदस्यीय जांच समिति गठित होगी
समिति की रिपोर्ट पर आधारित दोनों सदनों में वोटिंग होगी
2/3rd Majority मिलने पर जज को पद से हटाया जा सकता है
इससे पहले भी हटाए जा चुके हैं जज
Justice V. Ramaswami (1991): भारत के पहले जज जिनके खिलाफ removal motion लाया गया
Justice Soumitra Sen (2011): Rajya Sabha में प्रस्ताव पास होने के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया
Justice P.D. Dinakaran (2011): प्रस्ताव से पहले ही दिया इस्तीफा
Justice J.B. Pardiwala (2015): प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ा
क्या Lok Sabha में आएगा प्रस्ताव?
सरकार अभी इस पर विचार कर रही है कि लोकसभा में प्रस्ताव लाया जाए या राज्यसभा में। क्योंकि दोनों सदनों में राजनीतिक समीकरण और संख्याबल अलग-अलग हैं, इसलिए BJP नेतृत्व विपक्षी दलों से बैकचैनल बातचीत कर रहा है ताकि प्रस्ताव पारित करने के लिए जरूरी समर्थन सुनिश्चित किया जा सके।