Justice Verma vs Judiciary: क्या नकदी कांड की जांच में Natural Justice की अनदेखी हुई?

Delhi Cash Scandal में नाम आने के बाद चर्चा में आए इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने गुरुवार को Supreme Court का रुख किया है। उन्होंने अपने खिलाफ चली In-House Inquiry को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें “गंभीर दुराचार” का दोषी ठहराया गया था। इस रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने उनके खिलाफ Impeachment Proceedings की सिफारिश की थी।

 याचिका में क्या कहा गया?

जस्टिस वर्मा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि:

उन्हें निष्पक्ष सुनवाई (Fair Hearing) का पूरा अवसर नहीं दिया गया।

जांच प्रक्रिया पूर्वग्रह से ग्रसित (Biased and Pre-Planned) थी।

उनसे ही बेकसूर होने का सबूत मांगना Natural Justice के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

नकदी के स्वामित्व को लेकर कोई ठोस या प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं था।

उन्होंने यह भी दावा किया कि जांच समिति ने उनकी सफाई को सिरे से खारिज करते हुए उसे सिर्फ “इनकार” और “षड्यंत्र” कहकर टाल दिया।

 क्या है Cash Recovery का पूरा मामला?

14 मार्च को दिल्ली स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के बाहरी हिस्से में आग लगने की घटना के बाद, दमकल कर्मियों को बोरे में बंद जली हुई नकदी मिली थी। यह मामला मीडिया की सुर्खियों में आ गया और जल्द ही Delhi High Court के तत्कालीन चीफ जस्टिस ने इसकी जानकारी CJI को दी।

22 मार्च को तीन जजों की In-House Inquiry Committee बनाई गई जिसमें शामिल थे:

Justice Shree Nagu (Chief Justice, Punjab & Haryana High Court)

Justice GS Sandhawalia (Chief Justice, Himachal Pradesh HC)

Justice Anu Sivaraman (Judge, Karnataka HC)

 रिपोर्ट में क्या कहा गया?

3 मई को 64-पेज की रिपोर्ट CJI Sanjiv Khanna को सौंपी गई।

जांच में 55 गवाहों के बयान लिए गए और 10 दिनों तक पूछताछ हुई।

रिपोर्ट में कहा गया कि जस्टिस वर्मा का नकदी पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण था।

यह आचरण Judiciary की गरिमा और Public Trust के खिलाफ बताया गया।

समिति ने इसे Serious Misconduct करार देते हुए Impeachment के योग्य माना।

CJI ने यह रिपोर्ट President Droupadi Murmu और PM Narendra Modi को भेजी।

 संसद में महाभियोग की तैयारी

जस्टिस वर्मा की याचिका ऐसे समय दाखिल हुई है जब Monsoon Session (21 जुलाई से शुरू) में केंद्र सरकार उनके खिलाफ Impeachment Motion लाने की योजना बना रही है। सूत्रों के मुताबिक, Law Minister Arjun Ram Meghwal को प्रस्ताव पेश करने की ज़िम्मेदारी दी गई है।

 राजनीतिक मोड़: विपक्ष भी सक्रिय

विपक्षी गठबंधन INDIA Bloc भी इस अवसर का लाभ उठाने की कोशिश में है। वे जस्टिस शेखर कुमार यादव (इलाहाबाद हाई कोर्ट) के खिलाफ पहले से लंबित महाभियोग प्रस्ताव को फिर से उठाने की योजना बना रहे हैं। दिसंबर 2024 में 55 विपक्षी सांसदों ने उनके खिलाफ प्रस्ताव दिया था, जिसमें VHP Event Speech को आधार बनाया गया था।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन-हाउस जांच शुरू करने की योजना राज्यसभा सचिवालय के हस्तक्षेप के कारण ठप हो गई थी। इस बीच Vice President Jagdeep Dhankhar ने 19 मई को सार्वजनिक रूप से In-House Inquiry Mechanism पर सवाल उठाए और Criminal Investigation को अधिक उचित बताया।

Justice Yashwant Verma Case भारतीय न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं की पारदर्शिता, निष्पक्षता और जिम्मेदारी के सवालों को सामने लाता है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ चलने वाली इन-हाउस जांचों की संवैधानिक वैधता और पारदर्शिता किस हद तक स्वीकार्य है।