जिन्ना, कांग्रेस और माउंटबेटन: कौन हैं 1947 के विभाजन के अपराधी?

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने हाल ही में “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस” (14 अगस्त) पर एक विशेष मॉड्यूल जारी किया, जिसमें 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों और संस्थाओं की पहचान की गई है।

इस मॉड्यूल के अनुसार तीन मुख्य दोषी हैं:

मोहम्मद अली जिन्ना – जिन्होंने पाकिस्तान की मांग की।

कांग्रेस – जिन्होंने विभाजन को स्वीकार किया।

लॉर्ड माउंटबेटन – जिन्होंने इसे लागू किया।

विभाजन के पीछे की राजनीति

मॉड्यूल में नेहरू के जुलाई 1947 भाषण का हवाला दिया गया है:
“हमें या तो विभाजन स्वीकार करना होगा या गृहयुद्ध और अराजकता का सामना करना होगा। विभाजन बुरा है, लेकिन गृहयुद्ध की कीमत उससे कहीं अधिक होगी।”

एनसीईआरटी के विशेष मॉड्यूल कक्षा 6–8 और 9–12 के छात्रों के लिए पूरक संसाधन के रूप में बनाए गए हैं। ये नियमित पाठ्यपुस्तकों का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि प्रोजेक्ट्स, पोस्टर्स, बहस और चर्चा के माध्यम से पढ़ाए जाते हैं।

इतिहासकारों की प्रतिक्रिया

दिल्ली स्थित इतिहासकार डॉ. रुचिका शर्मा का कहना है कि केवल जिन्ना, माउंटबेटन और कांग्रेस को दोषी ठहराना अति सरल दृष्टिकोण है। उनका कहना है कि हिंदू महासभा और चरमपंथी विचारक वी.डी. सावरकर के विचार भी विभाजन के लिए जिम्मेदार थे।

विभाजन के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

मॉड्यूल में विभाजन के परिणामों का भी विस्तार से वर्णन है:

कम से कम 6 लाख लोगों की मौत और 1.5 करोड़ लोग विस्थापित हुए।

पंजाब और बंगाल की अर्थव्यवस्था बर्बाद हुई।

जम्मू-कश्मीर में सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय संकट पैदा हुआ।

सांप्रदायिक अविश्वास और शत्रुतापूर्ण सीमाएँ बनीं, जो आज तक भारत में तनाव का कारण हैं।

दीर्घकालिक प्रभाव और कश्मीर विवाद

मॉड्यूल बताता है कि विभाजन के कारण भारत आज भी आंतरिक सांप्रदायिक विखंडन और बाहरी शत्रुता का सामना कर रहा है।

पाकिस्तान द्वारा कश्मीर संघर्ष में हस्तक्षेप और आतंकवाद का समर्थन विभाजन की जड़ से जुड़े हैं।

दो प्रमुख समुदायों के बीच बनी संदेह और वैमनस्य अब भी जारी है।