“India Should Run as per Majority?” – विवादित बयान देने वाले जज पर नहीं चलेगी जांच, जानें क्यों SC ने पीछे खींचे कदम

Judicial Conduct in Question – इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव द्वारा ‘भारत को बहुसंख्यकों की इच्छा के अनुसार चलना चाहिए’ जैसे बयान के बाद उत्पन्न विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। Supreme Court of India द्वारा उनके खिलाफ संभावित जांच की तैयारी की जा रही थी, लेकिन Rajya Sabha Secretariat से आए एक पत्र ने इस प्रक्रिया को रोक दिया है।

क्या था मामला?

पिछले साल, जस्टिस यादव ने VHP (Vishva Hindu Parishad) के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में यह कहा था कि भारत बहुसंख्यकों की इच्छा के अनुसार चलेगा” और केवल एक हिंदू ही भारत को विश्वगुरु बना सकता है”। उनके भाषण में Triple Talaq, Halala जैसी प्रथाओं को “सामाजिक पिछड़ापन” कहा गया और उन्होंने Uniform Civil Code (UCC) की वकालत की। इस भाषण के videos viral on social media हुए और Secularism एवं Judicial Neutrality पर बहस छिड़ गई।

Supreme Court ने क्यों रोकी जांच?

सूत्रों के अनुसार, तत्कालीन Chief Justice of India (CJI) Sanjiv Khanna ने इस बयान की जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। यहां तक कि Chief Justice of Allahabad High Court की ओर से प्रतिकूल रिपोर्ट भी दी गई थी।

लेकिन मार्च में Rajya Sabha Secretariat ने एक पत्र भेजा जिसमें कहा गया कि किसी High Court Judge के खिलाफ जांच और कार्रवाई का अधिकार केवल Parliament और President of India को है। Vice President Jagdeep Dhankhar, जो राज्यसभा के सभापति भी हैं, उन्होंने संसद में कहा था कि इस मामले में Article 124 और 217 के तहत सिर्फ संसद को ही अधिकार प्राप्त है।

अब क्या होगा?

अब यह मामला Judicial Misconduct के दायरे से निकलकर Parliamentary Action की दिशा में बढ़ चुका है। किसी भी तरह की कार्रवाई के लिए यह मामला अब Rajya Sabha Chairman के माध्यम से संसद में उठेगा और वहां से President of India को भेजा जाएगा। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, Supreme Court कोई स्वतंत्र जांच शुरू नहीं कर सकती।

जस्टिस यादव के बयान का असर

जस्टिस यादव के बयान ने न सिर्फ Judicial Ethics बल्कि Religious Neutrality के मूल सिद्धांतों पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना था:

  • “भारत बहुसंख्यकों की इच्छाओं के अनुरूप चले तो ही यह विश्वगुरु बन सकता है।”

  • “तीन तलाक और हलाला जैसी प्रथाएं पिछड़ी सोच को दर्शाती हैं।”

  • “UCC लागू कर इन कुरीतियों को समाप्त करना जरूरी है।”

इस भाषण के बाद Opposition leaders, Legal experts और Civil society से तीखी प्रतिक्रियाएं आईं।