India-China को साथ आना ही होगा! नहीं तो खतरे में पड़ सकता है पूरा एशिया – सिंगापुर के एक्सपर्ट का बड़ा अलर्ट
India-China Relation 2024: भारत और चीन के बीच चल रहे तनाव सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं, बल्कि एशिया की स्थिरता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। यही बात कही है सिंगापुर के मशहूर पूर्व राजनयिक और लेखक किशोर महबूबानी ने, जिन्होंने चेतावनी दी है कि अगर भारत और चीन साथ नहीं आए तो पूरे एशियाई क्षेत्र को गंभीर राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।
India-China Relation: ‘जुनून एकतरफा है’, बोले महबूबानी
किशोर महबूबानी ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा:
“भारत के लोग 1962 के युद्ध को गहराई से याद रखते हैं, लेकिन चीन के आम लोगों को इसकी जानकारी तक नहीं है। यही इस रिश्ते को विषम बनाता है।”
उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में चीन को लेकर एक जुनून है, जबकि चीन में भारत को लेकर वैसी कोई भावना नहीं है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि मनमोहन सिंह ने एक बार कहा था –
“दुनिया इतनी बड़ी है कि भारत और चीन दोनों साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।”
क्या भारत और चीन साथ रह सकते हैं? – Asia Stability की सबसे बड़ी चुनौती
महबूबानी के मुताबिक,
“अगर एशिया को शांति और तरक्की चाहिए तो भारत और चीन को साथ रहना ही होगा। दोनों देशों की आबादी 1.4 और 1.3 बिलियन है। 2050 तक भारत सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा। ऐसे में अगर ये दो एशियाई महाशक्तियां साथ नहीं आईं, तो पूरे एशिया की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।”
Past vs Present: हमें 2,000 साल की शांति याद रखनी चाहिए, न कि 50 साल की कड़वाहट
महबूबानी ने एशियाई युवाओं से खास अपील करते हुए कहा कि उन्हें हाल की झड़पों से ऊपर उठकर इतिहास की उस अवधि को देखना चाहिए जब भारत और चीन 2,000 वर्षों तक शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में थे।
“पश्चिमी उपनिवेशवाद से पहले, भारत और चीन ने कभी युद्ध नहीं लड़ा। इतिहास में इतनी लंबी शांति को भुला देना, एक गंभीर भूल होगी।”
क्या कूटनीति फिर से जिंदा हो रही है?
महबूबानी की यह टिप्पणी ऐसे वक्त पर आई है जब भारत-चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों में बर्फ पिघलने के संकेत दिख रहे हैं:
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रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने हाल ही में कहा कि रूस RIC (Russia-India-China) वार्ता को फिर से शुरू करने का इच्छुक है।
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उन्होंने ये भी बताया कि गलवान घाटी के बाद जो वार्ता ठप हो गई थी, अब उस पर कुछ “सहमति” बनी है।
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2024 के BRICS Summit में पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात भी इसी सिलसिले की कड़ी मानी जा रही है।