Haridwar Chandi Mandir विवाद: महंत की तीन महिलाओं से जुड़े रिश्तों पर हाईकोर्ट सख्त

Haridwar Chandi Mandir Controversy: नैनीताल हाईकोर्ट ने हरिद्वार के प्रसिद्ध माँ चंडी देवी मंदिर में हो रहे विवाद और कथित आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए मंदिर प्रबंधन को अस्थायी रूप से बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) को सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही, Reena Bisht को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) भी दी गई है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

‘तीन रिश्ते, एक महंत’ – कोर्ट हैरान

Justice Rakesh Thapliyal की एकलपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले पर कड़ी नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति ने कहा:

“ये कैसा महंत है जो एक महिला से शादीशुदा है, दूसरी के साथ लिव-इन में रह रहा है और तीसरी महिला के साथ छेड़खानी के मामले में जेल में बंद है? मंदिर जैसे पवित्र स्थल पर इस तरह की हरकतें आस्था के साथ खिलवाड़ हैं।”

कोर्ट ने कहा कि मंदिर परिसर में अब संबंधित किसी भी व्यक्ति का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए और मंदिर की sanctity बनाए रखने के लिए प्रशासन जिम्मेदार रहेगा।

क्या है पूरा मामला? जानिए पूरी कहानी

पीड़िता ने कोर्ट में कहा कि उसका विवाह मंदिर के तत्कालीन महंत Rohit Giri से हुआ था। लेकिन बाद में रोहित गिरी ने Reena Bisht को घर में रहने दिया और बताया कि वह पहले ही दो अन्य पुरुषों से विवाह कर चुकी है, लेकिन परिस्थितियों ने उसे मजबूर कर दिया।

2022 में पीड़िता को एक डायरी मिली, जिसमें Rohit द्वारा Reena के नाम ₹5.5 लाख की FD बनाने की बात लिखी गई थी। पूछताछ पर रोहित ने स्वीकार किया कि Reena ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाकर वीडियो बना लिया था, जिसके चलते वह उसे पैसे देने पर मजबूर था।

जनवरी 2025 में Reena और Rohit की एक बेटी का जन्म हुआ, जिससे उनके रिश्ते की सच्चाई सामने आई। इसके बाद मई 2025 में Punjab Police ने रोहित को एक और महिला से छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि रोहित और उसके साथियों ने उसे मंदिर के ट्रस्टी पद से जबरन इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया और साथ ही मंदिर के चढ़ावे की राशि की लूट का झूठा आरोप लगाकर फर्जी केस में फंसाने की साजिश रची।

Reena Bisht को मिली राहत, मंदिर प्रबंधन पर कोर्ट का बड़ा फैसला

Reena Bisht की ओर से दायर anticipatory bail application पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत दी और सुरक्षा देने के आदेश दिए। साथ ही यह स्पष्ट किया कि अब Chandi Mandir का पूरा प्रबंधन BKTC के हाथों में रहेगा जब तक कि आगे का आदेश न आ जाए।

Court की स्पष्ट चेतावनी: आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं सहेंगे

कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आस्था को ठेस पहुंचाने वाला बताया। Justice Thapliyal ने कहा कि:

“मंदिर में इस प्रकार की गतिविधियां न सिर्फ भक्तों की श्रद्धा को चोट पहुंचाती हैं, बल्कि पूरे धार्मिक ढांचे की पवित्रता को भी दागदार करती हैं।”