Chaos over UP Electricity Tariff Hike, consumers express strong opposition
उत्तर प्रदेश में बिजली की दरों में प्रस्तावित 30 प्रतिशत बढ़ोतरी को लेकर उपभोक्ताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UP Electricity Regulatory Commission) के पास उपभोक्ताओं की ओर से भारी संख्या में आपत्तियां दाखिल की गई हैं, जिससे यह साफ है कि लोग Electricity Price Hike in UP को लेकर गंभीर असहमति जता रहे हैं। नियामक आयोग ने बिजली दरों पर सुनवाई की प्रक्रिया 7 जुलाई 2025 से शुरू करने का ऐलान किया है।
क्या है बिजली महंगी करने का तर्क?
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन (UP Power Corporation) ने बिजली कंपनियों की कमाई और बिजली आपूर्ति पर होने वाले खर्च के बीच ₹19,600 करोड़ से अधिक का घाटा दर्शाया है। इस फाइनेंशियल गैप को कम करने के लिए पावर कॉरपोरेशन ने मौजूदा बिजली दरों में 30% तक इजाफा (Power Tariff Hike Proposal) करने का प्रस्ताव रखा है।
उपभोक्ता परिषद की आपत्तियां और मांगें
हालांकि, UP Electricity Consumers Forum और Consumer Council ने इस प्रस्ताव को नकारते हुए नियामक आयोग में याचिका दाखिल की है। उन्होंने मौजूदा बिजली दरों में 40-45% की कटौती की मांग की है। परिषद का कहना है कि जब बिजली सेवाओं की गुणवत्ता नहीं सुधर रही है, तो दरें क्यों बढ़ाई जाएं?
उपभोक्ता परिषद के मुख्य तर्क:
AT&C Losses (Aggregate Technical & Commercial Losses) को जानबूझकर ज्यादा दिखाया गया।
Electricity Bill Recovery के आंकड़े संदिग्ध हैं।
Previous Tariff Orders का पालन नहीं किया गया।
बिजली कंपनियों द्वारा पोल लगाने के नाम पर लिए गए पैसे के बावजूद पोल न लगाना।
लोकल फॉल्ट्स के कारण बार-बार बिजली कटौती।
Monthly Fuel Surcharge जैसे अतिरिक्त शुल्कों पर आपत्ति।
Hearing Schedule और संभावित असर
7 जुलाई से शुरू होने वाली सुनवाई में न केवल उपभोक्ता परिषद बल्कि विभिन्न वर्गों के आम उपभोक्ता भी शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इस विरोध का असर Power Tariff Revision in UP की प्रक्रिया पर पड़ेगा। यह सुनवाई उपभोक्ताओं और पावर कंपनियों के बीच हितों के टकराव को सामने लाएगी।