महाराष्ट्र चुनाव विवाद: HC ने फर्जी मतदान की याचिका खारिज, जज बोले – ‘अदालत का समय बर्बाद किया’

उच्च न्यायालय का कड़ा रुख: फर्जी मतदान याचिका खारिज

बॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court) ने 2024 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Election 2024) में फर्जी मतदान (fake voting) के आरोप वाली याचिका को बुधवार को खारिज कर दिया। याचिका में मतदान समय समाप्ति के बाद अचानक बढ़े हुए मतदान आंकड़ों (voting figures after polling hours) को लेकर सवाल उठाए गए थे।

न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस मामले में अदालत का अमूल्य समय व्यर्थ गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के आधारहीन दावों से लोकतंत्र की कार्यप्रणाली पर अनावश्यक दबाव पड़ता है।

कौन दायर कर रहा था याचिका?

यह याचिका वंचित बहुजन आघाड़ी (Vanchit Bahujan Aghadi) के विक्रोली कार्यकर्ता चेतन अहिरे ने दाखिल की थी। उनकी ओर से अधिवक्ता प्रकाश आंबेडकर ने कोर्ट में दलीलें पेश की थीं। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाए और विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) प्रणाली की विश्वसनीयता पर विवाद किया।

76 लाख वोटों में अचानक वृद्धि: चुनाव प्रक्रिया पर सवाल

अंबेडकर ने दावा किया कि चुनाव के बाद मतदान संख्या में 76 लाख वोटों का अचानक इजाफा कोई मामूली गलती नहीं हो सकती। उनका कहना था कि यह घटना केवल चुनाव प्रक्रिया (election process) की पारदर्शिता को नहीं, बल्कि पूरे देश के लोकतंत्र (democracy in India) पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने किया विरोध

इस याचिका के खिलाफ Election Commission of India (ECI) और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (Chief Electoral Officer) ने कोर्ट में तर्क दिया कि यह दावा पूरी तरह से निराधार और तथ्यों से दूर है। उन्होंने याचिका की विश्वसनीयता को चुनौती दी और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भरोसा जताया।

कोर्ट का फैसला और लोकतंत्र की अहमियत

288 विधानसभा सीटों पर हुए इस चुनाव में फर्जी मतदान के आरोपों को लेकर गहराई से जांच के बावजूद हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस सबूत के चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना न सिर्फ न्याय व्यवस्था का समय बर्बाद करना है, बल्कि लोकतंत्र की भावना के खिलाफ भी है।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में फर्जी मतदान के आरोपों की जाँच के बाद भी कोर्ट ने ये मामला खारिज कर दिया है। चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और ईवीएम की विश्वसनीयता पर उठे सवालों को अदालत ने बेबुनियाद करार दिया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत का लोकतंत्र और उसके चुनावी संस्थान मजबूत और भरोसेमंद हैं।