Singhast Kumbh Nashik 2027 में बड़ा बदलाव, जानिए क्यों Shahi Snan की जगह Amrit Snan

Nashik-Trimbakeshwar Singhast Kumbh Mela 2027 इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रहा है। पहली बार इस धार्मिक आयोजन में सदियों पुरानी Shahi Snan (royal bath) की परंपरा को खत्म कर Amrit Snan (divine bath) की शुरुआत की जा रही है। यह निर्णय नासिक में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया, जिसमें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, अखाड़ा परिषद और कुंभ मेला आयोजन समिति के प्रमुख सदस्य शामिल थे।

क्या है Amrit Snan और क्यों लिया गया यह फैसला?

बैठक में Mahant Rajendras Das Maharaj ने सुझाव दिया कि शाही स्नान की जगह अब इसे ‘Amrit Snan’ कहा जाए। यह नामकरण Samudra Manthan mythology से प्रेरित है, जहां अमृत की बूंदें नासिक समेत चार कुंभ स्थलों पर गिरी थीं।
अखाड़ों के संतों का मानना है कि स्नान को राजसी प्रदर्शन की बजाय spiritual discipline और पवित्रता का प्रतीक होना चाहिए।

Mahant Bhakti Charan Das, अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़े के प्रवक्ता ने बताया कि “Shahi Snan” की परंपरा मुगल शासनकाल की देन है, और अब समय है कि इसे अधिक आध्यात्मिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया जाए।

Nashik Kumbh 2027 Important Dates

नासिक सिंहस्थ कुंभ मेला की शुरुआत 31 अक्टूबर 2026 को पारंपरिक Dhwajarohan Ceremony के साथ होगी। इसके बाद Amrit Snan की तिथियां इस प्रकार हैं:

  • 2 August 2027 – पहला Amrit Snan

  • 31 August 2027 – दूसरा Amrit Snan

  • 11 September 2027 – तीसरा Amrit Snan (Nashik)

  • 12 September 2027 – अंतिम Amrit Snan (Trimbakeshwar)

  • 29 July 2027 – Nagar Pradakshina (city procession)

Prayagraj Kumbh 2025 से मिली प्रेरणा

इससे पहले Prayagraj Kumbh Mela 2025 में भी “Amrit Snan” की शुरुआत की गई थी, जिसे देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक स्वीकार किया। नासिक में भी इसी मॉडल को अपनाने की योजना है ताकि कुंभ मेला की आध्यात्मिक गरिमा और पौराणिक महत्व और अधिक प्रबल हो सके।

क्या बदलेगा इससे कुंभ का स्वरूप?

“Amrit Snan” की अवधारणा सिर्फ नाम का बदलाव नहीं है, बल्कि यह आयोजन को royalty-based symbolism से हटाकर mythological and devotional roots की ओर ले जाने की कोशिश है। इससे कुंभ मेला की अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।