Ayodhya Dhwajarohan: From Shiladan to Kar Seva… this is how the 500-year-old Ram Temple movement progressed
सदियों पुराने संघर्ष के बाद राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का सपना अब साकार रूप में सामने खड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश के बाद शुरू हुए निर्माण कार्य का अंतिम चरण आज पूरा हो रहा है। कुछ ही घंटों में राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण होगा, और इसके साथ 500 वर्षों के आंदोलन की भावनात्मक यादें फिर ताज़ा हो उठी हैं।
रामजन्मभूमि आंदोलन ने कई चरणों में अपनी दिशा बदली—कभी अदालतों में कानूनी संघर्ष, कभी जन-आंदोलन की उग्रता, कभी शिलादान और कारसेवा तो कभी रथयात्रा जैसी ऐतिहासिक घटनाएँ इस पूरे सफर का हिस्सा रहीं।
1949: रामलला के प्राकट्य से शुरू हुआ नया अध्याय
22 दिसंबर 1949 की रात विवादित ढांचे के भीतर रामलला की मूर्ति प्रकट हुई, जिसने पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।
मूर्ति को हटाने के आदेश हुए, लेकिन जनता के कड़े विरोध के चलते ऐसा संभव नहीं हो पाया।
इसके बाद:
1950 में फैज़ाबाद कोर्ट में गोपाल सिंह विशारद ने पूजा का अधिकार मांगते हुए पहला मुकदमा दायर किया।
16 जनवरी 1950 को अदालत ने पूजा-पाठ जारी रखने की अनुमति दे दी।
1959 में निर्मोही अखाड़ा
1961 में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जमीन के स्वामित्व के लिए मुकदमे दायर किए।
1984–1989: रथयात्रा, जन जागरण और शिलादान
7 अक्टूबर 1984 को सीतामढ़ी (बिहार) से शुरू हुई जन जागरण रथयात्रा ने आंदोलन को नए स्वरूप में ढाला। इसी साल दिल्ली में हुई रैली ने Ram Janmabhoomi Mukti Sankalp की नींव रखी।
इसके बाद:
Ram Janmabhoomi Yagya Samiti का गठन
आंदोलन की कमान VHP (Vishwa Hindu Parishad) को मिली
साधु-संतों की अगुवाई में देशव्यापी चरणबद्ध कार्यक्रम शुरू हुए
1 फरवरी 1986 को जिला अदालत ने विवादित ढांचे का ताला खुलवाने का आदेश दिया
1989 में वीएचपी की ओर से शिला पूजन देशभर में आयोजित किया गया
9 नवंबर 1989 को राम मंदिर का शिलान्यास तय हुआ
1990–1992: आडवाणी की रथयात्रा और कारसेवा
लालकृष्ण आडवाणी ने गुजरात से Rath Yatra शुरू की, जिसने आंदोलन को राजनीतिक मोड़ दिया।
बिहार में रथ रोका गया और माहौल तनावपूर्ण होता चला गया।
इसके बाद:
30 अक्टूबर 1990 को कारसेवा के दौरान गोलीकांड
6 दिसंबर 1992, कल्याण सिंह सरकार में कारसेवकों द्वारा विवादित ढांचे का ध्वंस
इस घटना ने भारतीय राजनीति, सामाजिक विमर्श और कानूनी प्रक्रियाओं को गहराई से प्रभावित किया।
2010: इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला
हाई कोर्ट ने 2010 में विवादित परिसर को तीन हिस्सों में बांटने का निर्णय सुनाया।
मामला इसके बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
2019: Supreme Court Verdict बदल गया इतिहास
9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने पूरी विवादित भूमि हिंदू पक्ष को सौंपने और
Ram Mandir Construction Trust बनाने का आदेश दिया।
5 फरवरी 2020: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन
5 अगस्त 2020: भूमि पूजन संपन्न
22 जनवरी 2024: रामलला की भव्य प्राण-प्रतिष्ठा
2024–2025: मंदिर परिसर का चरणबद्ध निर्माण
5 जून 2025: राम दरबार, शेषावतार और परकोटे के छह मंदिरों में मूर्तियों की स्थापना
27 अक्टूबर 2025: मंदिर शिखर और आठ मंदिरों पर कलश स्थापना
25 नवंबर 2025: शिखर ध्वजारोहण – भव्य मंदिर निर्माण की ‘पूर्णता’ का प्रतीक
Ram Mandir Movement Timeline — संक्षेप में
राम मंदिर शिलान्यास – 9 नवंबर 1989
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला – 9 नवंबर 2019
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट गठन – 5 फरवरी 2020
भूमि पूजन – 5 अगस्त 2020
रामलला प्राण-प्रतिष्ठा – 22 जनवरी 2024
मूर्तियों की स्थापना (परकोटा मंदिर) – 5 जून 2025
कलश स्थापना (8 मंदिर) – 27 अक्टूबर 2025
शिखर ध्वजारोहण समारोह – 25 नवंबर 2025
आज पूर्णाहुति और PM Modi की घोषणा
पिछले चार दिनों से चल रहे Dhwajarohan Rituals मंगलवार सुबह पूर्ण होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी:
अनुष्ठानों की पूर्णाहुति करेंगे
अभिजित मुहूर्त (11:30 AM के बाद) में ध्वजारोहण करेंगे
और Ram Mandir Construction Completion की औपचारिक घोषणा करेंगे
मंदिर परिसर के सात अन्य मंदिरों के ध्वजारोहण अनुष्ठान भी इसी समय पूरे किए जाएंगे।