AI will take away jobs, governments are hiding the incomplete truth? A big question arose in Shubhankar Mishra's court
AI (Artificial Intelligence) अब कोई दूर की चीज़ नहीं रही, ये अब हमारे घर, दफ्तर और रोज़गार का हिस्सा बन चुका है। मगर सवाल है — क्या हम इसके खतरों के लिए तैयार हैं? या फिर सरकारें और सिस्टम हमें केवल AI का glorified version दिखा रहे हैं?
Shubhankar Mishra अपने नए शो ‘कचहरी’ में इन्हीं मुद्दों पर सख्त सवाल पूछते हैं — AI vs Employment, गरीबी, डिजिटल असमानता, और gender impact of AI।
7 करोड़ लोग नहीं कमा पाते रोज़ के 62 रुपये: क्या AI से और टूटेंगे सपने?
भारत में आज भी 7 करोड़ से ज्यादा लोग ऐसे हैं जो हर दिन 62 रुपये से भी कम कमाते हैं।
यानी एक पूरे ब्रिटेन जैसी आबादी गरीबी की दलदल में धंसी हुई है।
भारत की GDP अगर तेज़ी से बढ़ रही है तो ये सवाल अहम है कि उसका फायदा सिर्फ कुछ चुनिंदा नावों तक क्यों सीमित है?
AI job loss सिर्फ फिक्शन नहीं, आपके दरवाज़े तक पहुंच चुका है
AI Revolution अब किसी Silicon Valley की कहानी नहीं रह गई है। यह आपके ऑफिस, आपके शहर, आपके करियर को बदल रहा है।
Shubhankar Mishra सवाल उठाते हैं:
“अगर एक दिन आप उठें और पता चले कि आपकी नौकरी किसी Chatbot ने ले ली… तो क्या करेंगे?”
AI धीरे-धीरे एक ऐसी दुनिया बना रहा है जहां इंसानों की जगह machine learning models ले रहे हैं — और बिना किसी चेतावनी के।
Technology दो वर्ग बना रही है: जो बदल रहे हैं और जो बदल दिए जाएंगे
AI की दुनिया अब दो हिस्सों में बंटती दिख रही है:
वे जो AI के साथ adapt कर रहे हैं
और वे करोड़ों लोग, जिनकी ज़िंदगी बदलने वाली है, लेकिन उन्हें इसका मतलब भी नहीं पता
उनके लिए “GPT”, “Algorithm” और “Automation” खतरनाक भविष्य के शब्द हैं।
क्या महिलाएं होंगी सबसे बड़ा टारगेट?
AI का असर केवल नौकरियों तक सीमित नहीं है।
Shubhankar Mishra यह भी पूछते हैं कि क्या AI महिलाओं के लिए बड़ी चुनौती बनने जा रहा है?
ऑटोमेशन से सबसे पहले जिन क्षेत्रों में नौकरियां जा रही हैं, वहां महिलाओं की भागीदारी ज़्यादा है — जैसे डेटा एंट्री, कस्टमर सपोर्ट, ट्रांसलेशन, back-office roles।
Democracy vs Automation: क्या राजा का बेटा ही राजा बनेगा?
शुभांकर मिश्रा यह भी कहते हैं कि इस देश में अब भी राजा का बेटा राजा बन रहा है।
AI और Automation जैसी तकनीकें कहीं सिर्फ खास लोगों के फायदे का ज़रिया न बन जाएं और आम आदमी के लिए ये नौकरी का संकट लेकर आएं।
Show ‘Kachahri’ में उठे सवाल:
क्या सरकारें जानबूझकर AI से जुड़ी सच्चाई छिपा रही हैं?
क्या गरीबों और महिलाओं की नौकरियां पहले खत्म होंगी?