Big news for Kingfisher employees: the ED has released a payment of ₹312 crore.
लंदन (London) में भगोड़े कारोबारी विजय माल्या (Vijay Mallya) के pre-birthday celebration की तस्वीरें सामने आने के ठीक एक दिन बाद भारत में प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate – ED) ने बड़ा ऐलान किया है। ईडी ने बताया कि उसने Kingfisher Airlines के पूर्व कर्मचारियों के लंबे समय से अटके बकाये के भुगतान के लिए ₹312 करोड़ की राशि लौटाई है।
ईडी के अनुसार, यह रकम Official Liquidator को सौंपी गई है, ताकि इसके जरिए किंगफिशर एयरलाइंस के सैकड़ों पूर्व कर्मचारियों को उनका बकाया भुगतान किया जा सके।
DRT की मंजूरी के बाद संभव हुआ भुगतान
यह राहत Chennai स्थित Debt Recovery Tribunal (DRT) की अनुमति के बाद संभव हो सकी। डीआरटी ने State Bank of India (SBI) को निर्देश दिया था कि पहले से लौटाए गए शेयरों की बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग कर्मचारियों के बकाये के निपटारे के लिए किया जाए।
ईडी का कहना है कि यह कदम वर्षों से वेतन और अन्य देनदारियों का इंतजार कर रहे कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत है।
कैसे जुड़ा है मामला Vijay Mallya से
गौरतलब है कि loan fraud case दर्ज होने के बाद विजय माल्या भारत छोड़कर लंदन चला गया था। इसके बाद CBI और ED ने उसके खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज किए।
ईडी ने Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत विजय माल्या, किंगफिशर एयरलाइंस और उससे जुड़ी कंपनियों की ₹5,042 करोड़ की संपत्तियां जब्त की थीं। इसके अलावा करीब ₹1,695 करोड़ की अन्य संपत्तियां भी कुर्क की गई थीं।
जनवरी 2019 में विजय माल्या को आधिकारिक रूप से Fugitive Economic Offender घोषित किया गया था।
बैंकों को 14,132 करोड़ की रिकवरी
बाद में Special PMLA Court ने डीआरटी के माध्यम से जब्त की गई सभी संपत्तियों को SBI के नेतृत्व वाले banking consortium को लौटाने की अनुमति दी।
इन संपत्तियों की बिक्री के बाद बैंकों को कुल ₹14,132 करोड़ की recovery हुई, जो किंगफिशर लोन डिफॉल्ट केस में अब तक की सबसे बड़ी वसूली मानी जाती है।
कर्मचारियों के बकाये को दी गई प्राथमिकता
ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, एजेंसी ने सभी संबंधित पक्षों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया कि कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित बकाये का निपटारा हो सके।
अधिकारी ने बताया कि SBI ने डीआरटी में एक interim application दायर कर यह पेशकश की थी कि संपत्तियों से मिलने वाली रकम में से पहले employees’ dues का भुगतान किया जाए, भले ही वे सुरक्षित लेनदारों (secured creditors) से पहले क्यों न हों।
वर्षों बाद जगी कर्मचारियों की उम्मीद
इस फैसले के बाद किंगफिशर एयरलाइंस के सैकड़ों पूर्व कर्मचारियों को वर्षों बाद अपने बकाये की रकम मिलने की उम्मीद जगी है। यह वही कर्मचारी हैं, जो एयरलाइन बंद होने के बाद से वेतन, ग्रेच्युटी और अन्य देनदारियों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।